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आखिर घड़ी की दिशा की ओर क्यों शुरू की जाती है भगवान की परिक्रमा, जान लीजिए सही नियम

Published: Tue, 19 May 2026 01:54 PM (IST)

सनातन धर्म में देवी-देवताओं की परिक्रमा का विशेष महत्व है, जो हमेशा घड़ी की दिशा में की जाती है। यह ...और पढ़ें

मंदिर की परिक्रमा के नियम (Picture Credit- AI Generated)

मंदिर की परिक्रमा के नियम (Picture Credit- AI Generated) 

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में देवी देवताओं की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। पूजा के दौरान नियम का पालन करने से साधक को शुभ फल मिलता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही देवी-देवताओं की परिक्रमा लगाई जाती है।

इससे देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और साधक की सभी मुरादें पूरी करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मंदिर में परिक्रमा घड़ी की दिशा में ही क्यों की जाती है। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।

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घड़ी की दिशा में क्यों लगाई जाती है परिक्रमा?

पूजा-पाठ के दौरान मंदिरों में भगवान की परिक्रमा हमेशा घड़ी की दिशा में परिक्रमा लगाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, घड़ी की सुई की दिशा में परिक्रमा करने से साधक का शरीर सकारात्मक ऊर्जाओं को सही से ग्रहण कर पाता है। इसलिए मंदिर में घड़ी की दिशा में परिक्रमा लगाने का विशेष महत्व है।

परिक्रमा हमेशा घड़ी की दिशा में की जाती है, जिसे हिंदू धर्म में 'प्रदक्षिणा' कहा जाता है। परिक्रमा करने से मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। अगर उल्टी दिशा में घूमेंगे, तो ऊर्जा का टकराव होगा, जिससे परिक्रमा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा। अग्नि पुराण और वराह पुराण में मूर्तियों की प्रदक्षिणा के नियम के बारे में विस्तार से बताया गया है।

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परिक्रमा लगाने के नियम

  • परिक्रमा को धीमी गति और शांत मन से करनी चाहिए। इस दौरान बहुत तेज नहीं चलना चाहिए।
  • परिक्रमा करते समय पैर घिसटकर चलने से बचना चाहिए।
  • इस दौरान किसी के बारे में गलत न सोचें और किसी से वाद-विवाद न करें। ऐसा करने से परिक्रमा का फल नष्ट हो जाता है।
  • परिक्रमा सदैव स्नान करने के बाद और साफ वस्त्र पहनकर करनी चाहिए।
  • परिक्रमा नंगे पैर करनी चाहिए।
  • परिक्रमा के समय हाथों को जोड़कर हृदय के पास रखना चाहिए।
  • परिक्रमा करते समय हाथ खुले या लटकते हुए नहीं होने चाहिए।
  • इस दौरान काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए।

किस भगवान की कितनी परिक्रमा करें?

  • भगवान गणेश- 3 परिक्रमा करनी चाहिए।
  • भगवान शिव- परिक्रमा के दौरान ध्यान रखें कि शिवजी की जलाधारी को लांघा नहीं जाता। जलाधारी से वापस लौट आना चाहिए।
  • भगवान विष्णु- 4 परिक्रमा करना शुभ माना जाता है।
  • देवी दुर्गा और माता लक्ष्मी-1 परिक्रमा करनी चाहिए।
  • सूर्य देव 7 परिक्रमा और हनुमान जी की 3 परिक्रमा करनी चाहिए।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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