अधिकमास में पूरा गोवर्धन गूंज रहा राधे-राधे से, परिक्रमा के लिए रात में उमड़ रही लाखों की भीड़
गोवर्धन में अधिकमास मेले का शुभारंभ हो गया है, जहां लाखों श्रद्धालु 'राधे-राधे' के उद्घोष के साथ परिक्रमा कर रहे ...और पढ़ें

गोवर्धन में दंडवती परिक्रमा लगाते श्रद्धालु।
रसिक शर्मा, गोवर्धन (मथुरा)। वह ब्रजभूमि, जहां श्रीकृष्ण ने अन्याय के विरुद्ध शंखनाद किया, गोवर्धन उठाकर प्रकृति और धर्म की रक्षा का संदेश दिया और प्रेम को राधा में समर्पित कर अमर बना दिया। उसी ब्रज में अधिकमास का शुभारंभ हो गया।
15 जून तक चलने वाला अधिकमास मेला इस बार भी श्रद्धा, सेवा और समृद्धि का अद्भुत संगम बन रहा है। गोवर्धन की गलियां भक्ति के रंग में डूबने लगी हैं। गिरिराज प्रभु की परिक्रमा को उमड़ने वाली भक्तों की भीड़ मंदिरों और मार्गों को जीवंत कर रही है।
ब्रजभूमि की अर्थव्यवस्था में भी नई ऊर्जा का संचार होने लगा है। रविवार से अधिकमास शुरू हो गया। आधी रात में भी परिक्रमा मार्ग पर ''राधे राधे'' और ''गिरिराज महाराज की जय'' के उद्घोष गूंज रहे हैं।
भजन मंडलियों की स्वर लहरियां, दीपों की चमक और श्रद्धालुओं की अविरल पदयात्रा पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक उत्सव में बदल रही है। इस दौरान गोवर्धन का कोई कोना शांत नहीं है।
होटल, गेस्ट हाउस, धर्मशालाएं, ढाबे, चाय की दुकानें, प्रसाद विक्रेता, ई-रिक्शा चालक और छोटे व्यापारी सभी की जिंदगी में इस मेले से रौनक है।
सरकारी बसों से लेकर निजी वाहनों तक हर पहिया आस्था की रफ्तार के साथ दौड़ रहा है। कुल मिलाकर अधिकमास का यह महीना ब्रज की अर्थव्यवस्था के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है।
एक महीने तक फुल रहेंगे हजारों कमरे
श्रीजी गार्डन के एमडी भूपेंद्र शर्मा के अनुसार गोवर्धन परिक्रमा क्षेत्र में 200 से अधिक होटल, गेस्ट हाउस और मठ-मंदिर संचालित हैं। कई स्थानों पर 50 से 100 कमरे तक उपलब्ध हैं।
औसतन 30 कमरे प्रति प्रतिष्ठान भी माने जाएं तो करीब छह हजार कमरे पूरे महीने श्रद्धालुओं से भरे रहेंगे।
प्रसाद कारोबार में बरसेगा करोड़ों का आशीर्वाद
अधिकमास का सबसे बड़ा असर प्रसाद कारोबार पर दिखाई देता है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार करीब एक हजार परिवार सीधे इस व्यवसाय से जुड़े हैं। श्रद्धालु गिरिराज प्रभु को चिनौरी, चिड़वा, मिश्री और पेड़े का प्रसाद अर्पित करते हैं।
अनुमान है कि इस बार केवल प्रसाद की बिक्री ही करीब 10 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। गिरिराज प्रभु को अर्पित होने वाला चिड़वा गुजरात के राजकोट जिले के गोंडल से मंगाया जाता है, जबकि चिनौरी जयपुर से आती है।
बड़े स्टॉकिस्ट भले ही सीमित हों, लेकिन रिटेल दुकानदारों की लंबी श्रृंखला पूरे मेला क्षेत्र में फैली रहती है।
मंदिरों में लग रहीं करोड़ों की बोलियां
इस बार अधिकमास में श्रद्धालुओं की संख्या पुराने रिकार्ड तोड़ सकती है। मंदिरों की भेंट सेवा के लिए लगी करोड़ों की बोलियां भी इसी ओर संकेत कर रही हैं।
मुकुट मुखारविंद मंदिर का चढ़ावा सेवा ठेका 2.09 करोड़ रुपये में, दानघाटी मंदिर का 1.51 करोड़ रुपये में और जतीपुरा मुखारविंद मंदिर का ठेका 1.18 करोड़ रुपये में हुआ है।
वहीं हर गोकुल मंदिर का ठेका 70.12 लाख और लक्ष्मी नारायण मंदिर का ठेका 11.50 लाख रुपये में लिया गया।
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