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आखिर क्यों दीवाली पर रातभर खुला रहता है घर का मुख्य दरवाजा? बंद चौखट लौटा सकती है मां लक्ष्मी को वापस!

Published: Thu, 05 Nov 2026 10:00 AM (IST)

दीवाली पर घर का मुख्य द्वार खुला रखने की परंपरा लक्ष्मी और कुबेर के आगमन व सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश ...और पढ़ें

दीवाली पर मुख्य द्वार खुला रखने का रहस्य

दीवाली पर मुख्य द्वार खुला रखने का रहस्य

HighLights

  1. दीवाली पर लक्ष्मी-कुबेर के आगमन हेतु द्वार खुला रखते हैं।

  2. सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश के लिए मुख्य द्वार खुला रखना शुभ।

  3. सुरक्षा हेतु बंद करने पर चौखट पर अखंड दीपक जलाएं।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दीवाली हिंदू धर्म के सबसे खास त्योहारों में से एक है। रोशनी, खुशहाली और सुख-समृद्धि का प्रतीक दीवाली इस साल 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जानी है। दीवाली (Diwali 2026) के मौके पर हिंदू घरों में मां लक्ष्मी-गणेश की पूजा के साथ कई तरह की परंपराओं का पालन किया जाता है।

इस दिन घर के प्रत्येक कोने को दीपक की रोशनी से सजाया जाता है, ताकि कोई भी कोना अंधकार में न रहे और लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त हो। इस दिन लोग अपने घर के मुख्य द्वार को सुंदर-सुंदर सजावटी चीजों से सजाने के साथ दीपक जलाते हैं। लेकिन दीवाली से जुड़ी एक परंपरा ये भी है कि कई लोग रातभर अपने घर का मुख्य दरवाजा खुला रखते हैं। आखिर दीवाली से जुड़ी इस परंपरा के पीछे का सच क्या है, आइए जानते हैं एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी से।

दीवाली की रात द्वार क्यों खुला रखा जाता है? 

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं और वास्तुशास्त्र की माने तो, दिवाली की रात खासकर प्रदोष काल से लेकर निशीथ काल तक घर का मुख्य द्वार खुला रखना अत्यंत शुभ और आवश्यक माना जाता है। आइए जानते हैं इसके पीछे की मुख्य धार्मिक मान्यताएं क्या हैं?

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मुख्य द्वार खुला रखने के प्रमुख कारण

माता लक्ष्मी और कुबेर का आगमन: मान्यता है कि दीपावली की रात महालक्ष्मी और कुबेर महाराज पृथ्वी लोक पर भ्रमण करते हैं और शुद्ध, अलंकृत तथा प्रकाशमान घरों में ही प्रवेश करते हैं। घर का बंद दरवाजा इस बात का प्रतीक माना जाता है कि उस घर में माता के स्वागत की तैयारी नहीं है।

सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश: मुख्य द्वार को घर का 'मुख' माना गया है। द्वार के दोनों ओर सरसों के तेल या शुद्ध घी के दीये जलाकर द्वार खुला रखने से घर में रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ का सहज प्रवेश होता है।

पूजन काल और रात का विधान: धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजन काल और आधी रात तक मुख्य द्वार को पूरा या आंशिक रूप से खुला रखना चाहिए।

रात में सुरक्षा और दीप जलाने का नियम

अखंड दीपक की परंपरा: देर रात सुरक्षा के नजरिए से जब मुख्य द्वार बंद किया जाता है, तब चौखट पर एक अखंड दीपक जलता रहना चाहिए।

प्रकाश का महत्व:इस प्रकार मुख्य द्वार पर प्रकाश निरंतर बने रहने से घर में माता लक्ष्मी की कृपा और उजाला हमेशा कायम रहता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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