जगदंबा कहकर ही क्यों पुकारते हैं मां दुर्गा को? जानिए इस पवित्र नाम का रहस्य
मां दुर्गा को जगदंबा क्यों कहा जाता है, यह जानने के लिए इस पवित्र नाम से जुड़ी धार्मिक मान्यता और ...और पढ़ें

जगदंबा नाम में छिपा है मां दुर्गा का कौन-सा स्वरूप? (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
जगदंबा का अर्थ है 'संसार की माता'।
मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर सृष्टि की रक्षा की।
महाकाली ने शिवजी को सृष्टि कल्याण का वरदान दिया।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मां दुर्गा को शक्ति, साहस, ममता और करुणा का प्रतीक माना जाता है। माता के भक्त देवी को जगदंबा कहकर पुकारते हैं और उनसे सुख-समृद्धि, रक्षा एवं कल्याण की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां जगदंबा की पूजा-अर्चना करने से भक्त के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और शुभ परिणाम मिलते हैं। जगदंबा शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- ‘जगत’ और ‘अंबा’। यहां जगत का अर्थ 'संसार' और अंबा का अर्थ 'माता' है।
जगदंबा को पूरे संसार की माता कहा जाता है। जब-जब धरती पर कोई संकट आया, तब-तब मां दुर्गा के विभिन्न रूपों ने सृष्टि की रक्षा की। क्या आप जानते हैं कि मां दुर्गा को जगदंबा क्यों कहा जाता है? अगर नहीं, तो आइए इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं इस पवित्र नाम से जुड़ी धार्मिक मान्यता और पौराणिक कथा।
मां दुर्गा को जगदंबा क्यों कहा जाता है?
दुर्गा सप्तशती में बताया गया है कि मां दुर्गा ने असुर महिषासुर का वध किया था। इसके बाद देवी-देवताओं ने देवी के सम्मान में एक स्तुतिगान गाया था। इसी दौरान मां पार्वती गंगा के उद्गम स्थल पर स्नान करने के लिए आईं और उन्होंने देवी-देवताओं का यह स्तुतिगान सुना। इसके बाद उन्होंने अपना बाहरी रूप त्याग कर अत्यंत शुभ रूप प्रकट किया। मां पार्वती के इसी रूप को 'अंबिका' नाम दिया गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शिवजी को ही मां अंबिका के पति के रूप में देखा जाता है।
एक अन्य कथा अनुसार, प्राचीन समय में जब मां अम्बा ने महाकाली का रूप धारण किया, तो वे त्रिदेवों की परीक्षा लेने उनके सामने प्रकट हुई थीं। महाकाली का यह रूप बहुत ही भयावह था और उनका रंग काला था। देवी के इस रूप को देखकर ब्रह्माजी और विष्णुजी डर गए।
वहीं, देवी के इस रूप को देखकर महादेव के मन में प्रेम का भाव जागृत हुआ। शिवजी के इस स्वभाव को देखकर महाकाली अत्यंत प्रसन्न हुईं। इसी वजह से महाकाली ने महादेव को यह वरदान दिया कि वे सृष्टि के कल्याण हेतु उनकी संगिनी बनेंगी, लेकिन शिवजी को उन्हें हर बार पाने के लिए कठोर प्रयास करना पड़ेगा। इसी कारण आदिशक्ति महाकाली शिवजी के जीवन में कभी देवी सती, तो कभी माता पार्वती के रूप में अवतरित हुईं।
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