विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मां दुर्गा क्यों कहलाती हैं 'सर्वमंगला', शादी से लेकर शुभ काम तक; क्यों सबसे पहले याद आता है यह नाम?

Published: Fri, 16 Oct 2026 03:30 PM (IST)

नवरात्र के दौरान मां दुर्गा को 'सर्वमंगला' क्यों कहा जाता है, दुर्गा सप्तशती और नारायणी स्तुति के अनुसार, मां सभी मंगलों को प्रदान करने वाली और कल्याणकारी हैं।

मां दुर्गा को सर्वमंगला क्यों कहा जाता है? (Picture Credits- AI Images)

मां दुर्गा को सर्वमंगला क्यों कहा जाता है? (Picture Credits- AI Images)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र का पावन त्योहार चल रहा है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। हर कोई विधि-विधान के साथ मां दुर्गा को की पूजा-अर्चना, उपासना, ध्यान-साधना और सेवा करता है। दुर्गा सप्तशती के अनुसार, मां दुर्गा के 108 से ज्यादा नाम हैं, जिनका जाप करना अपने आप में दैवीय कृपा को प्राप्त करने का सरल माध्यम है। दुर्गा मां को शक्ति, जगदंबा, महिषासुर मर्दिनी और सर्वमंगला जैसे कई नामों से पुकारा जाता है। आइए जानते हैं मां दुर्गा को सर्वमंगला क्यों कहा जाता है?

सर्वमंगलमंगलये शिवे सर्वार्थसाधिके | शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते ||

दुर्गा सप्तशती से जुड़ा यह श्लोक मां दुर्गा को शुभ फल प्रदान करने वाली, हर लक्ष्य की पूर्ति करने वाली और सबकी शरणस्थली, तीन नेत्रों वाली गौरी और नारायणी के रूप में पूजता है। यह श्लोक नारायणी स्तुति से लिया गया है।

मां दुर्गा को सर्वमंगला क्यों कहते हैं?

मां दुर्गा को समर्पित सर्व मंगल मंगल्ये मंत्र आदि पराशक्ति का एक स्वरूप है। मार्केंडेय पुराण के अध्याय 11 का 10वां श्लोक (सर्वमंगलमंगलये शिवे सर्वार्थसाधिके | शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते ||) नारायणी स्तुति है, जो देवताओं द्वारा देवी स्तुति के लिए किया जाता है।

मां दुर्गा को 'सर्वमंगला' इसलिए भी कहते हैं कि, क्योंकि मां दुर्गा जो समस्त संसार का मंगल और कल्याण करती है और जो खुद सभी तरह के मंगलों से युक्त हैं।

यह मंत्र मां दुर्गा को समर्पित होने के साथ एक ही स्वर में उनके चार नामों का उच्चारण करता है। शिव और गौरी उन्हें भगवान शिव और उनकी सौम्य पत्नी पार्वती माता से भी जुड़ता है, जिनकी नवरात्र में मां महागौरी के रूप में पूजा की जाती है। त्र्यंबक तीन नेत्रों वाली, वह नाम है जो खुद में शिव के साथ साझा करती हैं और नारायणी उन्हें भगवान विष्णु, नारायण की शक्ति के रूप में दर्शाती है।

दुर्गा सप्तशती के अध्याय 11 में शुंभ और निशुंभ का वध करने के वध इंद्र समेत सभी देवता प्रसन्नता और राहत के साथ देवी की स्तुति करते हैं। उनका यह भजन नारायणी स्तुति के नाम से जाना जाता है।

सर्व मंगल मंगल्ये का आध्यात्मिक महत्व

ज्यादातर प्रार्थनाएं या तो ईश्वर की स्तुति करती हैं या किसी चीज की याचना करती हैं। सर्व मंगल मंगल्ये दोनों काम एक साथ करते हैं, इसलिए यह प्रार्थना और आशीर्वाद दोनों का काम करता है। मां दुर्गा की यह स्तुति जीवन में दैवीय कृपा प्राप्त करने के लिए है।

नवरात्र के दौरान मां के इस मंत्र का जाप करने से हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है। इसी वजह से शादी, गृहप्रवेश, यात्रा, परीक्षा या नई दुकान के उद्धाटन से पहले इसका जाप जरूर किया जाता है। भक्तों का मानना है कि इससे जीवन के राह में आने वाली तमाम बाधाएं दूर होती हैं और आगे के कार्यों में देवी का भी आशीर्वाद जरूर मिलता है।

यह भी पढ़ें- Navratri Special: मां दुर्गा को महिषासुरमर्दिनी क्यों कहते हैं? जानें ब्रह्मा के वरदान से लेकर महिषासुर वध तक की कहानी

यह भी पढ़ें- क्यों कहा जाता है मां दुर्गा को 'शेरावाली माता'? पौराणिक कथाओं के पीछे छुपा है बड़ा रहस्य

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।