विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Navratri Special: मां दुर्गा को महिषासुरमर्दिनी क्यों कहते हैं? जानें ब्रह्मा के वरदान से लेकर महिषासुर वध तक की कहानी

Published: Fri, 16 Oct 2026 08:30 AM (IST)

मां दुर्गा को महिषासुरमर्दिनी इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने महिषासुर का वध किया था। जानें महिषासुर को ब्रह्मा जी ...और पढ़ें

मां दुर्गा के अनेक नाम। (Picture Credit- AI Generated)

मां दुर्गा के अनेक नाम। (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. महिषासुर को ब्रह्मा से मिला था अजेय वरदान।

  2. देवताओं की शक्तियों से हुआ मां दुर्गा का प्राकट्य।

  3. मां दुर्गा ने किया महिषासुर का वध, धर्म की जीत।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र का पर्व मां दुर्गा की भक्ति और शक्ति की आराधना का प्रतीक है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। आपने मां दुर्गा के कई नाम सुने होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्हें महिषासुरमर्दिनी क्यों कहा जाता है? इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, जो बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश देती है। आइए जानते हैं महिषासुर के जन्म से लेकर उसके वध तक की पूरी कहानी।

महिषासुरमर्दिनी शब्द का क्या अर्थ है?

मां दुर्गा को महिषासुरमर्दिनी इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने महिषासुर नाम के शक्तिशाली असुर का वध किया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महिषासुर अपनी इच्छा से भैंस और दूसरे रूप धारण कर सकता था। इसी कारण उसे महिषासुर कहा गया।

महिषासुरमर्दिनी शब्द दो भागों से मिलकर बना है। पहला, महिषासुर यानी भैंस का रूप धारण करने वाला असुर और दूसरा, मर्दिनी यानी उसका विनाश करने वाली। इस तरह महिषासुरमर्दिनी का अर्थ है महिषासुर का वध करने वाली देवी। यह नाम मां दुर्गा की शक्ति, साहस और दुष्टों का नाश करने वाली शक्ति को दर्शाता है।

ब्रह्मा जी के वरदान से महिषासुर हो गया था अहंकारी

पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर ने अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे वरदान मांगने के लिए कहा। तब महिषासुर ने ऐसा वरदान मांगा, जिससे उसकी मृत्यु किसी देवता, दानव या पुरुष के हाथों न हो सके।

वरदान मिलने के बाद महिषासुर को अपनी शक्ति पर बहुत घमंड हो गया। उसे लगता था कि अब कोई भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उसने यह नहीं सोचा कि एक स्त्री भी उसकी मृत्यु का कारण बन सकती है। यही उसका सबसे बड़ा भ्रम साबित हुआ।

महिषासुर ने स्वर्ग पर कर लिया था कब्जा

ब्रह्मा जी से वरदान मिलने के बाद महिषासुर का अत्याचार बढ़ने लगा। उसने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसने देवताओं को चुनौती दी और देवराज इंद्र को हराकर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया।

महिषासुर ने देवताओं को स्वर्ग से बाहर निकाल दिया और तीनों लोकों में आतंक फैलाने लगा। उसके अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवता भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव के पास पहुंचे। उन्होंने महिषासुर के आतंक से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की।

सभी देवताओं की शक्तियों से हुआ मां दुर्गा का प्राकट्य

महिषासुर का अंत करने के लिए सभी देवताओं ने अपनी दिव्य शक्तियां एक साथ प्रकट कीं। इन शक्तियों के तेज से एक अद्भुत देवी का प्राकट्य हुआ, जिन्हें मां दुर्गा के नाम से जाना गया।

मां दुर्गा को भगवान शिव ने त्रिशूल, भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र और देवराज इंद्र ने वज्र प्रदान किया। अन्य देवताओं ने भी उन्हें अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र दिए। हिमालय ने मां को सवारी के लिए सिंह प्रदान किया। इस तरह मां दुर्गा महिषासुर से युद्ध करने के लिए तैयार हुईं।

नौ दिनों तक चला मां दुर्गा और महिषासुर के बीच युद्ध

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध हुआ। महिषासुर अपनी शक्ति के बल पर देवी को हराना चाहता था। युद्ध के दौरान वह बार-बार अपना रूप बदलकर मां दुर्गा को भ्रमित करने की कोशिश करता रहा।

लेकिन मां दुर्गा ने अपने साहस, शक्ति और दिव्य अस्त्रों से उसका सामना किया। अंत में मां ने महिषासुर का वध कर दिया और देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई।

महिषासुर वध से मिलता है क्या संदेश?

महिषासुर के वध की कथा हमें सिखाती है कि अहंकार और अन्याय चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, उनका अंत निश्चित है। मां दुर्गा की विजय यह संदेश देती है कि सत्य, साहस और धर्म की शक्ति के सामने बुराई टिक नहीं सकती।

इसी विजय की याद में नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की विशेष पूजा की जाती है।  मां दुर्गा का महिषासुरमर्दिनी स्वरूप भक्तों को अन्याय के खिलाफ खड़े होने और बुराई पर अच्छाई की जीत में विश्वास रखने की प्रेरणा देता है।

यह भी पढ़ें- Shardiya Navratri 2026 Day 6: मां कात्यायनी की पूजा आज, देखें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और खास भोग

यह भी पढ़ें- Navratri Puja:क्यों की जाती है नवरात्र में सिर्फ नौ देवियों की पूजा? जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।