जो सोचोगे वही पाओगे, नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का एक श्लोक दिला सकता है मनचाही सफलता
शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2026) में दुर्गा सप्तशती का पाठ और सकारात्मक विचार मनचाही इच्छाओं को पूरा करने में सहायक ...और पढ़ें

दुर्गा सप्तशती श्लोक और मैनिफेस्टेशन

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र की भव्य शुरुआत हो चुकी है। इस साल 11 अक्टूबर से शुरू हुए इस नौ दिवसीय त्योहार का समापन 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी के मौके पर होगा।
हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, नवरात्र (Shardiya Navratri 2026) के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से मां दुर्गा अति प्रसन्न होती हैं और जीवन से सभी तरह की बुराइयों का अंत करती है। दुर्गा सप्तशती में मेनिफेस्टेशन को लेकर एक श्लोक का वर्णन देखने को मिलता है, जो आपको सोचने पर मजबूर कर देता है कि आप जैसा सोचते हैं या मन में जैसी इच्छाएं रखते हैं आपके साथ वैसा ही होने लगता है।
जैसा सोचेंगे वैसा बन जाएंगे
हिंदू दर्शन के अलावा विज्ञान भी इस बात को मानता है कि व्यक्ति जैसा सोचता है उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है। ऐसे में जो व्यक्ति अपनी इच्छा पर दृढ़ संकल्प के साथ ध्यान करता है, उसे उस इच्छा को पूरा करने का रास्ता भी मिल जाता है।
दुर्गा सप्तशती में एक श्लोक में बताया गया है कि-
पद्मेके न गच्छेतु यदिच्छेच्छुभमात्मनः
कवचेनावृतो नित्यं यत्र यत्रेव्र गच्छति
तत्र तत्रार्थलाभश्च विजयः सार्वकामिकः
यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्चितम्
परमेश्वर्यमतुलं प्राप्स्यते भूतले पुमान् भरोसेमंद
निर्भयो जायते मर्त्यः संग्रामेष्वपराजितः
त्रैलोक्ये तु भवेत्पूज्यः कवचेनावृतः पुमान्
इदं तु देव्याः कवचं देवानामपि दुर्लभम्
यः पठेत्ययतो नित्यं त्रिसन्ध्यं श्रद्धयान्वितः
देवी कला भवेत्स्य त्रैलोक्येष्वपराजितः
जीवेद् वर्षशतं साग्रामपपृत्युविवर्जितः
अर्थात्- यदि अपने शरीर का भला चाहते हो तो बिना कवच के कहीं एक कदम भी न जाए, कवच का पाठ करके ही अपनी यात्रा पर जाना चाहिए। कवच के द्वारा सब ओर सुरक्षित मनुष्य जहां-जहां भी जाता है, वहां-वहां उसे धन लाभ होता है तथा संपूर्ण कामनाओं की सिद्धि करने वाली जीत भी हासिल होती है।
वह जिस भी कार्य या वस्तु जो प्राप्त करने की कामना या सोचता है, उसे वह निश्चित ही प्राप्त कर लेता है। वह व्यक्ति इस पृथ्वी पर तुलना रहित महान ऐश्वर्य का जीवन जीता है। कवच के पाठ से सुरक्षित मनुष्य निर्भय हो जाता है। युद्ध में उसकी पराजय नहीं होती और वह तीनों लोकों में पूजनीय योग्य होता है।
देवी का यह कवच देवताओं के लिए दुर्लभ है। जो प्रतिदिन नियमपूर्वक तीनों संध्याओं को समय श्रद्धा के साथ इसका पाठ करता है, उसे देवी कला की प्राप्ति होती है तथा वह मनुष्य तीनों लोकों में कभी भी पराजित नहीं होता है। इतना ही नहीं वह अममृत्यु से रहित हो सौ से भी ज्यादा वर्षों तक जीता है।
लक्ष्य प्राप्त करने के लिए पढ़ें ये श्लोक
इस नवरात्र से अपने दिनचर्या में दुर्गा सप्तशती के इस श्लोक को पढ़ने और इस पर विश्वास करने का नियम बनाए, क्योंकि आपके जीवन में विचारों, संकल्पों और कोशिशों का खास महत्व है।
यदि मन को एकाग्र करके सच्चे मन और विश्वास के साथ इसका पाठ किया जाए तो लक्ष्य प्राप्त करने का रास्ता सरल हो जाता है। देवी की विशेष कृपा पर आशीर्वाद बनाए रखने के साथ अपने लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ते रहें।
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