शारदीय नवरात्र 2026: बिजी रूटीन में नहीं मिल रहा पूजा का समय? सोने से पहले 11 बार पढ़ें यह 1 श्लोक
शारदीय नवरात्र 2026 के दौरान रात में 'दुर्गा सप्तशती' के विशेष मंत्र का 11 बार जाप करने से रोग, दोष और सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

मां दुर्गा का शक्तिशाली मंत्र (Picture Credits- AI Images)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र 2026 की भव्य शुरुआत हो चुकी है। आज नवरात्र का दूसरा दिन जो मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। मां ब्रह्मचारिणी जिन्हें संयम, त्याग, तप और दृढ़ संकल्प की देवी हैं।
इस नवरात्र मां दुर्गा को प्रसन्न कर आप अपने आने वाले भविष्य के लिए मंगल कामना कर सकते हैं। माना जाता है कि, दुर्गा पूजा (Durga Puja 2026) के पावन मौके पर दिन के समय जितनी पवित्रता बनी रहती है, उतनी ही रात को भी, क्योंकि मां दुर्गा को रात्रि बेहद पसंद है।
दुर्गा सप्तशती से जुड़ा खास श्लोक
नवरात्र 2026 पर जो लोग मां 'दुर्गा सप्तशती' का पाठ नहीं कर सकते हैं, उन्हें हर रात को सोने से पहले मां दुर्गा के एक खास मंत्र का जाप अवश्य करना ही चाहिए।
'दुर्गा सप्तशती' ग्रंथ में वर्णित मां के इस पवित्र मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को रोग, दोष, कष्ट, बाधा और जीवन की तमाम उलझनों से मुक्ति मिलती है।
मां दुर्गा का पवित्र श्लोक
माना जाता है कि नवरात्र के दौरान दिन से अधिक रात्रि पूजा, ध्यान और साधना काम करती है, क्योंकि इस दौरान आसपास का वातावरण बेहद शांत होता है और मां दुर्गा की साधना को आसान बनाता है।
जो लोग नवरात्र के दौरान अतिरिक्त पूजा-पाठ में समय नहीं दे पाते हैं या ऑफिस, स्कूल और कॉलेज जाते हैं, तो उन्हें हर रात सोने से पहले मात्र 11 बार मां दुर्गा के इस मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए।
इस श्लोक को आप सोने से पहले कर लेते हैं, मन में वो संकल्प लिए जिसके लिए आप दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, तो माता रानी आपकी इच्छा जरूर पूरा करती है।
श्लोक- सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते
In English- sarvamaṅgalamangalye sive sarvarthasadhike
saraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo stu te
मंत्र का संपूर्ण मतलब
सर्व मंगल मांगल्ये यानी सभी तरह के मंगल (शुभ फल) प्रदान करने वाली, परम मंगलमयी।
शिवे सर्वार्थ साधिके- शिव स्वरूपा जो भगवान शिव की पत्नी हैं। सभी तरह के लक्ष्यों, मनोकामनाओं और पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) को पूरा करने वाली।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी- शरणागतों की रक्षा करने वाली या शरण लेने योग्य। तीन नेत्रों वाली जिन्हें 'भूत, भविष्य और वर्तमान की जानकारी है। गौरी वर्ण वाली या माता पार्वती।
नारायणी नमोस्तुते-हे नारायणी (नारायण की शक्ति) मैं आपको नमस्कार करता हूं।
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