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शारदीय नवरात्र में दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले देवी कवच पढ़ना क्यों जरूरी होता है?

Published: Sun, 11 Oct 2026 02:30 PM (IST)

शारदीय नवरात्र में दुर्गा सप्तशती पाठ से पहले देवी कवच का पाठ करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह कवच ...और पढ़ें

शारदीय नवरात्र में कवच पाठ करने का महत्व  (Picture Credit: AI Generated)

शारदीय नवरात्र में कवच पाठ करने का महत्व  (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. देवी कवच दुर्गा सप्तशती का महत्वपूर्ण प्रारंभिक पाठ है।

  2. यह भक्तों को सुरक्षा, धन और विजय प्रदान करता है।

  3. ब्रह्मा जी ने ऋषि मार्कंडेय को इसकी महिमा बताई।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र का आरंभ आज यानी 11 अक्टूबर से हो गया है और यह इसका समापन 20 अक्टूबर दशहरा के पर्व के साथ होगा। इस दौरान माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा भक्ति भाव से की जाती है उन्हें प्रसन्न करने के लिए कई उपाय आजमाए जाते हैं।

इन्हीं में से एक होता है दुर्गा सप्तशती का पाठ करना। सभी भक्त नौ दिनों का उपवास करने के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करते हैं जिसमें मुख्य रूप से 13 अध्याय होते हैं। पाठ की शुरुआत में देवी कवच लिखा होता है जिसका पाठ करने से भक्तों के सभी अंगों की रक्षा होती है।

ऐसा कहा जाता है कि जब भी कोई व्यक्ति दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करता है, तो सबसे पहले कवच का पाठ करना जरूरी होता है। इस पाठ को भक्तों के लिए सुरक्षा कवच माना जाता है। आइए आपको बताते हैं इस पाठ के महत्व के बारे में और सबसे पहले इसे पढ़ना जरूरी क्यों होता है।

देवी कवच क्या होता है?

देवी कवच दुर्गा सप्तशती की शुरुआत में लिखा गया ऐसा पाठ है जो अठारह पुराणों में से एक मार्कंडेय पुराण के अंतर्गत दुर्गा सप्तशती का प्रमुख हिस्सा है। इस महाफलदायिनी देवी कवच को ब्रह्मा जी ने ऋषि मार्कंडेय को सुनाया है जिसमें 47 श्लोक हैं तथा 9 श्लोकों में फलश्रुति लिखित है।

जिसका मतलब होता है, इसको सुनने या पढ़ने से प्राप्त होने वाला लाभ। इस कवच में ब्रह्मा जी, माता पार्वती की नौ अलग-अलग दैवीय रूपों की प्रशंसा करते हैं। ब्रह्मा जी कहते हैं जो भी व्यक्ति श्री दुर्गा सप्तशती के कवच का नित्य पाठ करता है, माता दुर्गा का आशीर्वाद उसके जीवन में सदैव बना रहता है।

दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले देवी कवच पढ़ना जरूरी क्यों है?

देवी कवच में इस बात का वर्णन साफ़ मिलता है कि जो भी व्यक्ति दुर्गा सप्तशती का पाठ करे सबसे पहले उसे देवी कवच पढ़ना चाहिए। इसमें एक श्लोक है-

ॐ अस्य श्रीचण्डीकवचस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, चामुण्डा देवता, अङ्गन्यासोग्नो बीजम्, दिग्देवता तत्त्वम्, श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थे सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः॥ इसका अर्थ यह है कि- दुर्गा सप्तशती का प्रतिदिन पाठ करने से पहले कवच का पाठ अवश्य ही करना चाहिए। मां दुर्गा के इस कवच का पाठ करना बहुत ही प्रभावशाली होता है। क्योंकि कवच रखने वाला मनुष्य जहां-जहां भी जाता है, वहां-वहां उसे अवश्य ही धन लाभ होता है और विजय की प्राप्ति होती है।

देवी कवच का महत्व क्या है?

देवी कवच का महत्व दुर्गा सप्तशती में विस्तार से मिलता है जिसमें यह लिखा है कि देवी कवच का पाठ भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है और इसका पाठ करके घर से बाहर निकलने वाले व्यक्ति को कभी भी कोई परेशानी नहीं हो सकती है। वह व्यक्ति जिस अभीष्ट वस्तु की इच्छा करता वह उसको इस कवच के प्रभाव से अवश्य मिलती है और वह इसी संसार में महा ऐश्वर्य को प्राप्त होता है।

कवचधारी मनुष्य निर्भय होता है और वह तीनों लोकों में मान्य होता है। देवी का यह कवच देवताओं के लिए भी कठिन है। जो नित्य प्रति नियम पूर्वक श्रद्धा के साथ इसका पाठ करता है। उसे देव शक्ति प्राप्त होती है। वह तीनों लोकों को जीत सकता है तथा अकाल मृत्यु के भय से दूर रहता है। ऐसा व्यक्ति वर्षों तक जीवित रहता है और उसे रोग-दोष नहीं होते हैं।

दुर्गासप्तशती में कवच की महिमा ब्रह्मा जी ने ऋषि मार्कंडेय को सुनाई है और यह भी बताया है कि भक्तों को सप्तशती पाठ शुरू करने से पहले देवी कवच अवश्य पढ़ना चाहिए।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।