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शारदीय नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय रखें इन नियमों का ध्यान, वरना अधूरा रहेगा फल

Published: Sun, 04 Oct 2026 07:35 PM (IST)

शारदीय नवरात्र में दुर्गा सप्तशती पाठ करने के विशेष महत्व है, लेकिन इसके पूर्ण फलों की प्राप्ति के लिए इसके ...और पढ़ें

शारदीय नवरात्र में दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम (Picture Credit: AI Generated)

शारदीय नवरात्र में दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. पाठ से पहले स्नान और पूजा स्थल की सफाई करें।

  2. दुर्गा कवच के बिना सप्तशती पाठ आरंभ न करें।

  3. पाठ के बाद आरती, भोग और प्रसाद वितरण करें।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र साल के सबसे भक्तिपूर्ण समय में से एक पर्व माना जाता है। इस दौरान लोग माता का आशीर्वाद पाने के लिए कई तरह के उपाय आजमाते हैं। इन उपायों में व्रत-उपवास करना, घर में अखंड ज्योति जगाना, कलश की स्थापना करना और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना।

इन नौ दिनों में लोग माता दुर्गा को अलग-अलग तारीखों से प्रसन्न करते हैं और इस दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना मुख्य रूप से फलदायी माना जाता है। यही नहीं जो नियमित रूप से घर में विधि-विधान के साथ यह पाठ करता है उसके ऊपर माता की कृपा दृष्टि सदैव बनी रहती है।

इस पाठ को घर में करने केलुच विशेष नियम बनाए गए हैं और उनका पालन किए बिना यह पाठ पूर्ण नहीं माना जाता है। आइए आपको बताते हैं घर में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के नियमों के बारे में।

दुर्गा सप्तशती क्या है?

दुर्गा सप्तशती संस्कृत का एक भक्तिपूर्ण ग्रंथ है जो मार्कंडेय पुराण का हिस्सा है। इसे 'देवी माहात्म्य' के नाम से भी जाना जाता है और इसे 'चंडी पाठ' भी कहा जाता है। इस ग्रंथ का नाम 'सप्तशती' इसलिए पड़ा क्योंकि इस ग्रंथ में लगभग 700 श्लोक हैं जो 13 अध्यायों में बंटे हुए हैं।

यह ग्रंथ बातचीत के रूप में लिखा गया है, जिसमें ऋषि मार्कंडेय अपने शिष्य को कहानी सुनाते हैं। वे बताते हैं कि कैसे देवी ने ब्रह्मांड को राक्षसी ताकतों से बचाने के लिए अलग-अलग समय पर अवतार लिया। यह शक्ति पूजा के मुख्य ग्रंथों में से एक है और सदियों से भक्त इसका पाठ करते आ रहे हैं, खासकर नवरात्रि के दौरान। इस पाठ को घर में करने के कुछ विशेष नियम हैं।

दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम

अगर आप घर में शारदीय नवरात्र के दौरान दुर्गा सप्तशती पाठ करते हैं, तो यहां बताए नियमों का पालन जरूर करें।

  • पाठ से एक शाम पहले या उसी दिन सुबह पूजा की जगह को साफ कर लें, जिससे आखिरी आपसे जल्दबाजी में कोई गलती न हो।
  • पाठ शुरू करने से पहले स्नान करें और साफ कपड़े पहनें, किसी भी पूजा को करने के लिए शारीरिक स्वच्छता जरूरी मानी जाती है।
  • माता दुर्गा की तस्वीर के सामने साफ आसन बिछाएं और माता दुर्गा का ध्यान करते हुए दुर्गा सप्तशती का पाठ आरंभ करें।
  • पाठ शुरू करने पर सबसे पहले आप दुर्गा कवच का पाठ करें। ऐसा कहा जाता है कि दुर्गा कवच का पाठ किए बिना सप्तशती पाठ आरंभ नहीं करना चाहिए।
  • माता दुर्गा की तस्वीर के सामने दीया जलाएं और जहां तक संभव हो, पाठ के दौरान दीपक जलने दें।
  • आप नियमित पाठ करने से पहले कवच का पाठ जरूर करें और फिर क्रम से सभी अध्यायों को पढ़ें।
  • नियमित का पाठ पूरा होने पर आरती अवश्य करें और माता दुर्गा से क्षमा प्रार्थना करें।
  • आरती के बाद भोग या प्रसाद चढ़ाएं, जिसमें आमतौर पर फल या मिठाई का भोग लगाएं। माता दुर्गा को बताशे का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है।
  • आरती के बाद प्रसाद वितरण करें और माता से घर की खुशहाली की प्रार्थना करें।

अगर आप भी घर में दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं, तो ध्यान रखें कि आपको यहां बताए नियमों का पालन जरूर करना चाहिए।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।