शारदीय नवरात्र में कलश के ऊपर क्यों रखा जाता है नारियल? परंपरा के पीछे का तर्क समझें
शारदीय नवरात्र में कलश पर नारियल रखना एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसे पूजा की पूर्णता और दैवीय आशीर्वाद के लिए आवश्यक माना जाता है।

नवरात्र कलश स्थापना में नारियल का महत्व (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
नारियल को श्रीफल और लक्ष्मी जी का प्रिय फल कहते हैं।
यह ब्रह्मा, विष्णु, शिव तीनों देवताओं का प्रतीक माना जाता है।
गुरु बृहस्पति से संबंध, घर में खुशहाली और समृद्धि लाता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम में नारियल का इस्तेमाल होता है। यही नहीं नारियल से ही किसी भी पूजा की पूर्णता मानी जाती है। इसी वजह से किसी भी शुभ काम की शुरुआत में या इसकी पूर्णता पर नारियल जरूर तोड़ा जाता है।
जब शारदीय नवरात्र में कलश पर नारियल रखने की बात आती है, तो इसे भी एक जरूरी अनुष्ठान माना जाता है और इसके बिना कलश स्थापना को भी पूर्ण नहीं माना जाता है।
नवरात्र की पूजा-विधि में कलश की स्थापना एक अहम चरण होता है, क्योंकि यह देवताओं का आह्वान करने का माध्यम है। ऐसा माना जाता है कि बिना नारियल को कलश में रखे हुए आपको दैवीय आशीर्वाद नहीं मिलता है और बमाता दुर्गा का निवास घर में नहीं होता है। आइए आपको बताते हैं इस परंपरा का सही कारण क्या है?
नारियल को श्रीफल कहा जाता है
हिंदू धर्म शास्त्रों में नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है जिसका मतलब होता है लक्ष्मी जी का प्रिय फल। धार्मिक कथाओं में ऐसा कहा जाता है कि भगवान विष्णु जब पृथ्वी पर प्रकट हुए तब वो अपने साथ 3 चीजें लाए जिसमें पहली माता लक्ष्मी थीं, दूसरी कामधेनु गाय और तीसरा नारियल का वृक्ष था। उसी समय से नारियल को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का प्रिय फल माना जाने लगा और शुभ कामों में इसकी अनिवार्यता हो गई।
नारियल त्रिदेवों का प्रतीक
अगर हम पुराणों की मानें तो उसमें बताया गया है कि नारियल एक ऐसा फल है जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों देवताओं का वास है। इसी वजह से जब किसी भी पूजा में नारियल को शामिल किया जाता है या नवरात्र में कलश के ऊपर नारियल रखा जाता है, तब यह एक साथ तीनों देवताओं के आशीर्वाद का संकेत देता है। यही नहीं नारियल में मौजूद तीन आंखों को शिव जी की आंखें मानकर इनकी पूजा होती है।
नारियल का संबंध गुरु बृहस्पति से
नारियल को गुरु बृहस्पति का प्रतीक कहा जाता है और ऐसा माना जाता है कि नारियल को पूजा और कलश स्थापना में शामिल करने से गुरु की कृपा दृष्टि घर-परिवार में बनी रहती है। चूंकि गुरु को समृद्धि का ग्रह माना जाता है, इसलिए नवरात्र के कलश में नारियल रखने से घर में सदैव खुशहाली बनी रहती है।
कलश के ऊपर नारियल रखने की सही विधि
नवरात्र की पूजा के दौरान जब आप कलश स्थापित करें तो नारियल को एक सही तरीके से ही रखना चाहिए, जिससे उसका शुभ फल मिले।
- कलश के ऊपर आप नारियल को इस तरह रखें कि उसकी आंख पूजा करने वाले के मुख की तरफ हों।
- नारियल में हमेशा कलावा बांधकर ही इसे कलश के ऊपर रखें और साथ में कलश में आम के 5 पत्ते रखें। कलश को कभी भी खाली नहीं रखा जाता है, इसलिए नारियल रखने से पहले कलश में एक सिक्का डाल दें।
किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में नारियल का विशेष स्थान है और इसे पूजा-पाठ की पूर्णता से जोड़ा जाता है। यदि आप नवरात्र में कलश के ऊपर नारियल रखते हैं तो इसे भी बहुत शुभ माना जाता है।
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