जीवन के हर संकट का होगा अंत, शारदीय नवरात्र में बस ऐसे कर लें मां दुर्गा की षोडशोपचार पूजा
शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की षोडशोपचार पूजा का विशेष महत्व है। यह लेख सोलह प्रकार की पूजा विधि और ...और पढ़ें

षोडशोपचार पूजा के बिना अधूरी है मां दुर्गा की आराधना(Picture Credit: AI Generated)
HighLights
षोडशोपचार पूजा में सोलह प्रकार की सामग्री का प्रयोग।
मां दुर्गा की पूजा विधि के सभी महत्वपूर्ण चरण।
पूजा के दौरान पालन करने योग्य आवश्यक नियम और सावधानियां।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2026) का पर्व बेहद उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना अलग-अलग दिन होती है। हिंदू धर्म में मां दुर्गा की आराधना के लिए षोडशोपचार पूजा का विशेष महत्व है। षोडशोपचार पूजा का अर्थ है सोलह प्रकार की विशेष सामग्री और सत्कार के साथ मां दुर्गा की आराधना करना। इससे साधक को शुभ परिणाम मिलते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कैसे की जाती है मां दुर्गा की षोडशोपचार पूजा?
मां दुर्गा की षोडशोपचार पूजा विधि
आवाहन- सबसे पहले मां दुर्गा का ध्यान करते हुए उन्हें आमंत्रित करें।
आसन- इसके बाद मां को विराजमान करने के लिए एक सुंदर आसन दें। आसन पर मां दुर्गा को विधिपूर्वक विराजमान करें।
पाद्य- अब शुद्ध जल से मां दुर्गा के चरणों को धोएं।
अर्घ्य- चरणों को धोने के बाद मां दुर्गा का स्वागत करते हुए जल अर्पित करें।
आचमन- मुख शुद्धि के लिए एक बार फिर थोड़ा सा जल अर्पित करें।
स्नान- इसके बाद शुद्ध जल या पंचामृत से मां दुर्गा को स्नान कराएं।
वस्त्र- अब मां दुर्गा को चुनरी, साड़ी या नए वस्त्र पहनाएं।
यज्ञोपवीत- मां दुर्गा को जनेऊ अर्पित करें।
गंध और सिंदूर- देवी को गंध (चंदन) और सिंदूर अर्पित करें।
पुष्प- अब मां दुर्गा को ताजा फूलों की माला चढ़ाएं।
धूप- गूगल या लोबान की धूप दिखाएं।
दीप- इसके बाद सच्चे मन से देसी घी का दीपक जलाएं।
नैवेद्य- पंचमेवा, फल, खीर और मिठाई आदि का भोग लगाएं।
तांबुल- अब मां दुर्गा को पान और सुपारी चढ़ाएं।
आरती- मां दुर्गा की विधिपूर्वक आरती करें।
प्रदक्षिणा- अपनी जगह पर खड़े होकर मां दुर्गा की परिक्रमा करें।
इन बातों का रखें ध्यान
- षोडशोपचार पूजा के दौरान पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके पवित्र आसन पर बैठें।
- मां दुर्गा को लाल रंग प्रिय है, इसलिए देवी को लाल रंग के वस्त्र पहनाएं।
- पूजा में भूलकर भी बासी फूलों का प्रयोग न करें।
- इस दौरान किसी से वाद-विवाद न करें।
- किसी के बारे में गलत न सोचें।
- ब्रह्मचर्य से जुड़े नियमों का जरूर पालन करें।
- विधिपूर्वक आरती और मंत्रों का जप करें।
- पूजा के दिनों में घर में लहसुन, प्याज, मांसाहार और मदिरा का पूर्ण रूप से निषेध होना चाहिए।
- पूजा के अंत में भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।
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