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    दंडनायक शनि को क्‍यों चढ़ाया जाता है सरसों का तेल?

    Updated: Fri, 25 Apr 2025 08:00 PM (IST)

    शनिवार के दिन शनि मंदिर में जाकर या घर पर ही शनिदेव की प्रतिमा (Shani Dev Puja) पर सरसों का तेल चढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही उनके सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। ऐसा करने से दंडनायक शनिदेव का आशीर्वाद मिलता है। इसके साथ ही साढ़ेसाती ढैय्या या कुंडली में शनि की अशुभ स्थिति के कारण होने वाली परेशानियों का अंत होता है।

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    he Reason Behind Offering Mustard Oil - सरसों का तेल चढ़ाने के पीछे का कारण।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शनिदेव, जिन्हें न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है। हिंदू धर्म में छाया पुत्र का एक महत्वपूर्ण स्थान है। उनकी कृपा और प्रकोप दोनों ही व्यक्ति के जीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं। शनिदेव (Shani Dev) को खुश करने और उनकी नकारात्मक दृष्टि से बचने के लिए कई प्रकार के उपाय किए जाते हैं, जिनमें से एक प्रमुख उपाय है, उन्हें सरसों का तेल अर्पित करना है, तो आइए यहां जानते हैं कि दंडनायक शनि को सरसों का तेल क्यों चढ़ाया जाता है?

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    सरसों का तेल चढ़ाने के पीछे की वजह (The Reason Behind Offering Mustard Oil)

    ऐसा माना जाता है कि जब भगवान राम की सेना लंका तक पुल बना रही थी, तब हनुमान जी पुल की सुरक्षा का कार्यभार संभाल रहे थे। इसी दौरान शनिदेव हनुमान जी के बल और कीर्ति से प्रभावित होकर उनसे युद्ध करने के लिए आए। हनुमान जी भगवान राम की भक्ति में लीन थे और उन्होंने शनिदेव को समझाने का प्रयास किया, लेकिन शनिदेव युद्ध पर अड़े रहे।

    इसके बाद हनुमान जी और शनिदेव के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें हनुमान जी ने शनिदेव को पराजित कर दिया। युद्ध में घायल होने के कारण शनिदेव को असहनीय पीड़ा हो रही थी। तब हनुमान जी ने उनकी पीड़ा कम करने के लिए उनके शरीर पर सरसों का तेल लगाया। सरसों के तेल की तासीर गर्म होती है, जिससे शनिदेव को आराम मिला और उनकी पीड़ा शांत हुई।

    इस घटना के बाद शनिदेव ने कहा कि ''जो भी भक्त उन्हें भक्ति भाव के साथ सरसों का तेल अर्पित करेगा, उसके सभी कष्ट दूर होंगे और उनकी कृपा उस पर बनी रहेगी। तभी से शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।

    अन्य मान्यता

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सरसों के तेल का संबंध शनिदेव से है। सरसों का तेल काले रंग का होता है और शनिदेव को काला रंग प्रिय है। इसके अलावा, सरसों के तेल की तासीर गर्म होती है, जो शनिदेव की ठंडी प्रकृति को संतुलित करती है।

    ऐसा माना जाता है कि सरसों का तेल अर्पित करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की कुंडली से साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य शनि दोषों के नकारात्मक प्रभावों को कम करते हैं।

    सरसों का तेल चढ़ाने का धार्मिक महत्व (Religious Significance Of Offering Mustard Oil)

    शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाना केवल एक परंपरा ही नहीं, बल्कि इसके कई आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व भी हैं। मान्यता है कि सरसों का तेल चढ़ाने से शनिदेव भक्तों के सभी प्रकार के शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों को दूर करते हैं। साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    ऐसे में जो लोग शनि कृपा चाहते हैं, वे शनिवार के दिन न्याय के देवता को सरसों का तेल जरूर चढ़ाएं। इसके अलावा छाया का दान करें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।