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गणपति विसर्जन से पहले बप्पा को नारियल चढ़ाने से मिटते हैं जीवन के संकट, परंपरा के बीचे छिपा है गूढ़ रहस्य

Published: Wed, 16 Sep 2026 05:42 PM (IST)

गणपति विसर्जन से पहले बप्पा को नारियल चढ़ाने की परंपरा का गहरा महत्व है, जो जीवन के संकटों को दूर करने और अहंकार को त्यागने का प्रतीक है।

गणपति विसर्जन से पूर्व नारियल चढ़ाने का महत्व (Picture Credit: AI Generated)

गणपति विसर्जन से पूर्व नारियल चढ़ाने का महत्व (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. गणपति विसर्जन से पहले नारियल चढ़ाने की परंपरा का विशेष महत्व।

  2. यह नारियल अहंकार त्यागने और जीवन की बाधाएं मिटाने का प्रतीक।

  3. विसर्जन के समय नारियल बप्पा के साथ ही प्रवाहित किया जाता है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गणपति को प्रथम पूजनीय होने का दर्जा प्राप्त है और इसी वजह से किसी भी काम की शुरुआत में ही गणपति का पूजन किया जाता है। मुख्य रूप से गणेश उत्सव में गणपति पूजन की धूम होती है। इस उत्सव के पहले दिन घर में गणेश जी की स्थापना की जाती है और फिर भक्त संकल्प के अनुसार उनका विसर्जन करते हैं।

जहां कुछ लोग विसर्जन डेढ़ दिन में करते हैं, वहीं कुछ तीन और सात दिनों में भी करते हैं। गणपति विसर्जन पूरी तरह से अनंत चतुर्दशी के दिन होता है और विधि-विधान से गणपति की विदाई की जाती है।

गणपति विसर्जन से पहले भी कुछ रस्में निभाई जातीं हैं, फिर चाहें आप जिस दिन भी बप्पा को विदा करें, आपको इन नियमों को ध्यान में जरूर रखना चाहिए। इन्हीं नियमों में से एक है विसर्जन से पहले भगवान गणेश को नरियल चढ़ाना। आइए आपको बताते हैं आखिर क्यों जरूरी मानी जाती है यह परंपरा और इसका महत्व क्या है?

गणपति पूजन में नारियल चढ़ाने का महत्व

किसी भी पूजा में गणेश जी को नारियल चढ़ाने से हमारे जीवन की सभी बाधाएं दूर हो सकती हैं और यह सुख समृद्धि का कारक बनता है। वहीं पूजा के समय चढ़ाए गए नारियल का बाहरी कठोर हिस्सा व्यक्ति के अहंकार का प्रतीक माना जाता है, जिसे तोड़ना आवश्यक होता है।

नारियल किसी भी देवता को अर्पित करने के बाद उसे तोडना जरूरी होता है जिससे मन के साथ आत्मा की शुद्धि भी होती है। नारियल के भीतर का सफेद हिस्सा मन की निर्मलता को दिखाता है।

नारियल के ऊपरी हिस्से में मौजूद तीन आंखें- सत्व, रजस और तमस गुणों का प्रतीक हैं। वहीं गणपति विसर्जन से पहले नारियल तोड़ा नहीं जाता है, बल्कि इसे बप्पा को समर्पित किया जाता है।

हम गणपति को नारियल चढ़ाते हैं तब उनका पूरा आशीर्वाद मिलने के साथ यह सदैव हमारे घर में उनकी उपस्थिति का प्रतीक भी होता है।

जब विसर्जन से पूर्व गणपति प्रतिमा के सामने नारियल अर्पित किया जाता है, तब यह इस बात को दिखाता है कि अब गणेश जी का आशीर्वाद सदैव बना रहेगा। यही नहीं विसर्जन से पहले गणपति की विधि-विधान से पूजा और आरती भी की जाती है।

गणपति को चढ़ाए गए नारियल का क्या करें

हिंदू धर्म में नारियल को श्री फल भी कहा जाता है और यह गणपति को भी अत्यंत प्रिय है। किसी भी पूजा-पाठ में नारियल चढ़ाने के बाद इसे तोड़ दिया जाता है, लेकिन गणपति विसर्जन से पूर्व जो नारियल बप्पा को चढ़ता है, वो उनके साथ ही विसर्जित किया जाता है।

यह इस बात का प्रतीक होता है कि हमारे मन का अहंकार और सभी बुरे कर्म गणेश जी के साथ ही विसर्जित हो गए, लेकिन बप्पा का आशीर्वाद हमेशा साथ रहता है।

गणपति पूजन में नारियल तोड़ने के बजाय उनके साथ ही विसर्जित करने को उनके लिए सम्मान पूर्वक चढ़ाई गई भेंट माना जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।