भगवान गणेश ने क्यों लिए थे 8 अवतार? जानिए किस असुर का अंत करने के लिए बप्पा ने धरा कौन-सा रूप
सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है, जिन्होंने धर्म की रक्षा और असुरों का अंत करने के लिए आठ अवतार लिए थे।

भगवान गणेश के 8 अवतार का महत्व (Picture Credit: AI Generaed)
HighLights
भगवान गणेश ने धर्म रक्षा और असुरों के नाश हेतु आठ अवतार लिए।
प्रत्येक अवतार का उद्देश्य एक विशेष असुर का संहार करना था।
एकदंत से विघ्नराज तक, हर रूप की अपनी कथा और महत्व है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में सभी देवी-देवताओं में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। किसी भी शुभ और मांगलिक कार्यों में सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणपति बप्पा की साधना करने से सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
पुराणों के अनुसार, धर्म की रक्षा और असुरों का अंत करने के लिए भगवान गणेश ने आठ अवतार लिए थे। यह जानकर आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि भगवान गणेश के 8 अवतार कौन-से हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं गणपति के इन अवतारों के बारे में।
एकदंत
भगवान गणेश ने इस अवतार को देवताओं को मदासुर के प्रकोप से छुटकारा दिलाने के लिए लिया था। भगवान गणेश का एक दांत पूरा है और एक दांत टूटा हुआ है। इसलिए उन्हें एकदंत के नाम से भी जाना जाता है।
धूम्रवर्ण
भगवान गणेश ने यह अवतार अहंतासुर का नाश करने के लिए लिया था। गणपति के इस रूप में उनका वर्ण धुएं के समान है और वाहन अश्व है। गणपति जी का यह अवतार अहंकार से मुक्ति का मार्ग दिखाता है।
वक्रतुंड
पौराणिक कथा के अनुसार, गणपति बप्पा ने वक्रतुंड अवतार मत्सरासुर का अंत करने के लिए लिया था। इस अवतार में उनका वाहन सिंह है। साथ ही प्रभु के इस अवतार ने मत्सरासुर के दोनों पुत्रों का संहार भी किया था।
महोदर
जब मोहासुर नाम के एक राक्षस ने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर अपना अधिकार जमा लिया था, तो ऐसे में भगवान गणेश ने महोदर का अवतार लिया। इसके बाद गणपति बप्पा ने मोहासुर का अंत किया। इस अवतार में गणेश जी का वाहन मूषक है।
गजानन
भगवान गणेश ने गजानन का अवतार लेकर लोभासुर नाम के राक्षस का वध किया था। लोभासुर ने महादेव से वरदान प्राप्त किया था, जिसके बाद उसने सभी लोकों पर कब्जा जमा लिया था। तब देवताओं के द्वारा प्रार्थना करने पर भगवान गणेश ने गजानन के रूप में अवतार लिया।
लम्बोदर
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान गणेश ने लम्बोदर का अवतार क्रोधासुर का नाश करने के लिए लिया था। इस रूप में भी उनका वाहन मूषक है। ऐसा माना जाता है कि गणेश जी के इस रूप की पूजा करने से व्यक्ति क्रोध रूपी राक्षस से भी मुक्ति पा सकता है।
विकट
कामासुर दैत्य का वध करने के लिए गणेश जी ने विकट अवतार लिया था। इस अवतार में प्रभु मोर पर विराजमान हैं। कामासुर दैत्य ने तपस्या के द्वारा महादेव को प्रसन्न किया था, जिसके बाद शिव जी ने उसे वरदान दिया था। इसके बाद उसने तीनों लोकों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया था।
विघ्नराज
भगवान गणेश ने ममासुर का अंत करने के लिए विघ्नराज का रूप धारण किया था। इस अवतार में उनका वाहन शेषनाग है। भगवान गणेश के 8 अवतार का वर्णन मुद्गल पुराण में मिलता है।
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