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दुर्गा पूजा समेत हर शुभ अवसर पर बंगाली महिलाएं क्यों निकालती हैं 'उलू ध्वनि'? 99% लोग नहीं जानते रहस्य

Published: Tue, 20 Oct 2026 04:30 PM (IST)

बंगाल में दुर्गा पूजा और अन्य शुभ अवसरों पर महिलाएं 'उलू ध्वनि' निकालती हैं, जो शुभकामनाओं और सकारात्मकता का प्रतीक ...और पढ़ें

बंगाली महिलाएं क्यों निकालती हैं 'उलू ध्वनि' जानें महत्व (Picture Credit: AI Generated)

बंगाली महिलाएं क्यों निकालती हैं 'उलू ध्वनि' जानें महत्व (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. उलू ध्वनि शुभकामनाओं और सकारात्मकता का प्रतीक है।

  2. यह बुरी नजर से बचाती है, औरा को पॉजिटिव करती है।

  3. शुभ कार्यों की पूर्णता के लिए यह ध्वनि आवश्यक है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने बंगाल में कभी दुर्गा पूजा के दौरान महिलाओं को अचानक एक तेज आवाज में चिल्लाते हुए सुना है? दुर्गा पूजा ही नहीं किसी भी शुभ अवसर पर महिलाएं एक अलग आवाज में एक साथ बोलती हैं जिसे उलू ध्वनि कहा जाता है।

यह ध्वनि अक्सर धार्मिक उत्सवों, शादियों और अन्य शुभ मौकों पर सुनाई देती है। यह आवाज एक तरह की 'उल्युलेशन' मानी जाती है और यह एक ऐसी मौखिक परंपरा है जो दुनिया भर की कई संस्कृतियों में पाई जाती है।

मुख्य रूप से बंगाली महिलाएं हर खुशी के मौके पर इस ध्वनि को निकलती हैं और मानो वह इस ध्वनि के माध्यम से शुभता को निमंत्रण देती हैं। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इसे जीत, जश्न और नकारात्मकता को दूर करने से जोड़ा जाता है। आइए आपको बताते हैं इस अनोखी ध्वनि के कुछ रहस्यों और इसके महत्व के बारे में।

उलू ध्वनि शुभकामनाओं का प्रतीक

बंगाल में कोई भी शुभ काम हो तो महिलाएं उलू की ध्वनि के रूप में शुभकामनाएं देती हैं। इस ध्वनि को ही शुभ ध्वनि माना जाता है और इससे आस-पास की ऊर्जा भी सकारात्मक हो जाती है। उलू ध्वनि के कई फायदे होते हैं और इसको वातावरण के लिए सीधा सकारात्मक संदेश माना जाता है।

उलू ध्वनि से औरा पॉजिटिव होता है

बंगाली संस्कृति में ऐसा माना जाता है कि यह आवाज एक पॉजिटिव औरा बनाती है। बंगाल में इस ध्वनि के बिना कोई भी शुभ काम अधूरा माना जाता है।

इसके लिए महिलाएं किसी भी शुभ काम में सबसे पहले मंदिर जाकर यह ध्वनि निकालकर माता का आह्वाहन करती हैं और उसके बाद उस स्थान पर यह ध्वनि निकालती हैं जहां शुभ काम होता है। इस ध्वनि को गृह प्रवेश से पहले, शादी-विवाह जैसे अवसरों में और यहां तक कि दुर्गा पूजा में भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

बुरी नजर से बचाती है उलू ध्वनि

उलू ध्वनि को किसी भी तरह की बुरी नजर से बचाने का माध्यम माना जाता है। इसी वजह से किसी भी शुभ अवसर को बुरी नजर से बचाने के लिए उलू ध्वनि निकाली जाती है। इस ध्वनि के बिना किसी भी काम की पूर्णता नहीं मानी जाती है।

उलू ध्वनि के बिना अधूरे होते हैं शुभ काम

शादी में दूल्हा-दुल्हन के प्रवेश से लेकर दुर्गा पूजा की सभी रस्मों में उलू ध्वनि को विशेष माना जाता है। इसे सिर्फ एक ध्वनि नहीं माना जाता है बल्कि ये एक विशेष प्रकार से निकाली जाने वाली ऐसी आवाज होती है जो एक समुदाय का प्रतीक होती है।

इस ध्वनि को सबसे पहले समुदाय की सबसे बड़ी महिला आरंभ करती है फिर उसके बाद अन्य महिलाएं भी एक सुर में यह ध्वनि निकालती हैं। ऐसा लगता है मानो यह ध्वनि माता दुर्गा से घर और परिवार की कुशलता की कामना में निकाली जा रही हो।

दुर्गा पूजा के पंडाल पर निकाली जाने वाली यह उलू ध्वनि वास्तव में बहुत खास होती है जिसे शंखनाद के समान ही पवित्र माना जाता है। 

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।