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श्री कृष्ण की सीख: भगवत गीता में क्रोध को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु क्यों बताया गया है?

Published: Tue, 25 Aug 2026 06:00 PM (IST)

भगवान कृष्ण ने भगवत गीता में क्रोध को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु बताया है, क्योंकि यह बुद्धि को नष्ट कर गलत निर्णय लेने पर मजबूर करता है।

श्री कृष्ण के उपदेश: क्रोध है मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु (Picture Credit: AI Generated)

श्री कृष्ण के उपदेश: क्रोध है मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. क्रोध बुद्धि नष्ट कर गलत निर्णय लेने पर मजबूर करता है।

  2. यह विचारों, संबंधों और मानसिक शांति को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।

  3. महाभारत में दुर्योधन का क्रोध विनाश का प्रमुख कारण बना।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान कृष्ण ने गीता में कई ऐसे उपदेश दिए हैं जिनका अनुसरण करके व्यक्ति को सफलता मिल सकती है। वहीं गीता के अनुसार व्यक्ति के लिए जीवन में आगे बढ़ने के लिए कई भावनाओं पर नियंत्रण रखना भी अत्यंत जरूरी है।

इन्हीं में से एक है क्रोध, श्री कृष्ण ने गीता में क्रोध को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु बताया है। वो अर्जुन को उपदेश देते हुए कहते हैं कि क्रोध केवल एक भावना नहीं है बल्कि यह एक अग्नि है जो धीरे-धीरे हमारे जीवन में फैलती है और दुखों का कारण बनती है।

जब व्यक्ति का मन क्रोध से भर जाता है तब उसकी बुद्धि काम करना बंद कर देती है और उसके कर्म असफल होने लगते हैं। गीता में श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि जब मन क्रोध से भरा होता है तब बुद्धि नष्ट हो जाती है। बुद्धि नष्ट होने पर हम अपने सही कर्तव्यों का पालन नहीं कर पाते हैं और केवल विनाश की ओर बढ़ते हैं। आइए आपको बताते हैं श्री कृष्ण ने गीता में क्रोध को सबसे बड़ा शत्रु क्यों बताया है?

क्रोध से अच्छे विचार नष्ट होते हैं

श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि क्रोध हमारे विचारों, भावनाओं और स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है। छोटी-छोटी बात पर गुस्सा होना हमारे संबंधों और मानसिक शांति को नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार लोगों का बेवजह गुस्सा रिश्तों में जीवनभर के लिए दूरी लाता है और रिश्ते हमेशा के लिए टूट जाते हैं।

क्रोध गलत निर्णय का कारण बनता है

कई बार देखा जाता है कि व्यक्ति गुस्से में गलत निर्णय ले लेता है क्योंकि इस दौरान बिना सोचे-समझे ही व्यक्ति किसी बात पर भी गलत प्रतिक्रिया दे सकता है जो भविष्य के निय नुकसानदेह हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप हमारे बड़े से बड़े कार्यों का फल भी नकारात्मक होता है।

क्रोध में व्यक्ति विवेक खो देता है

जब कोई भी व्यक्ति गुस्से में होता है तब उसका अपनी बुध्दि पर नियंत्रण नहीं होता है और वो व्यक्ति क्रोध में अपना विवेक खो देता है। ऐसा व्यक्ति अपने कर्मों से स्वयं को और दूसरों को हानि पहुंचाता है।

क्रोध को सबसे बड़ा शत्रु क्यों बताया गया है?

महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन युद्ध भूमि पर खड़े होकर अपने कर्तव्य को लेकर उलझन में थे। उनके अपने उनके सामने थे। ऐसे में अर्जुन को क्रोध आ रहा था और श्री कृष्ण ने कहा- 'हे अर्जुन क्रोध का पालन मत करो। क्रोध से केवल विनाश होता है। जब मन क्रोध से भरा होता है तब बुद्धि नष्ट हो जाती है और निर्णय असफल हो जाते हैं। मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका अपना क्रोध है।'

दुर्योधन के क्रोध ने कौरवों को नष्ट कर दिया, भीष्म का आक्रोश, विवेकीन निर्णय और कर्ण का अहंकार, विनाश का कारण। ये ऐसे कई उदाहरण हैं जो गीता के उपदेश में बताए गए हैं और जो व्यक्ति के लिए विनाश का कारण बनते हैं।

वास्तव में क्रोध व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु है, इसलिए व्यक्ति को हमेशा इस पर नियंत्रण रखना चाहिए, जिससे उसे कार्यों में सिद्धि मिले।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।