महाअष्टमी पर पुष्पांजलि कब और कैसे करें? जानें फूल अर्पित करने का शुभ मुहूर्त और विधि
महाअष्टमी पर पुष्पांजलि कब करें? जानें 2026 में फूल अर्पित करने का शुभ मुहूर्त, सुबह का सही समय और पुष्पांजलि की सरल विधि।

महाअष्टमी पर पुष्पांजलि का महत्व !(Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र में महाअष्टमी का विशेष महत्व है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। भक्त माता रानी के चरणों में फूल और बेलपत्र अर्पित करके सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। महाअष्टमी पर पुष्पांजलि अर्पित करना पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे में भक्तों के मन में सवाल है कि साल 2026 में महाअष्टमी की पुष्पांजलि सुबह कितने बजे करें और इसका शुभ मुहूर्त क्या रहेगा? आइए जानते हैं।
महाअष्टमी पुष्पांजलि 2026 की तारीख
शारदीय नवरात्र 2026 में महाअष्टमी सोमवार, 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त सुबह स्नान करके मां दुर्गा की पूजा करते हैं और मंत्रों के साथ पुष्पांजलि अर्पित करते हैं। इस दिन देवी महागौरी के चरणों में फूल अर्पित करने के विशेष लाभ होते हैं।
महाअष्टमी पुष्पांजलि का शुभ मुहूर्त
19 अक्टूबर 2026 को पुष्पांजलि के लिए सुबह 6:30 बजे से 10:45 बजे तक का समय सबसे अच्छा बताया गया है। हालांकि, कुछ और मुहूर्त भी हैं, जिनमें देवी को पुष्पांजलि दी जा सकती है।
प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार बताए गए हैं:
- अमृत मुहूर्त: सुबह 6 बजकर 24 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक।
- पुष्पांजलि का सामान्य समय: सुबह 6 बजकर 30 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक।
- अन्य शुभ मुहूर्त: सुबह 9 बजकर 15 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट तक।
पुष्पांजलि से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
महाअष्टमी पर कई भक्त पुष्पांजलि देने से पहले व्रत रखते हैं। कुछ लोग सुबह स्नान करके बिना भोजन किए पूजा में शामिल होते हैं। हालांकि, उपवास करना हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं है। पुष्पांजलि के लिए ताजे फूल, बेलपत्र और अक्षत की आवश्यकता पड़ती है । पूजा के दौरान मंत्रों का ध्यानपूर्वक अनुसरण करें। मंदिर में पुष्पांजलि देने जा रहे हैं, तो वहां के निर्धारित समय और नियमों की जानकारी पहले ले लें।
महाअष्टमी पर पुष्पांजलि देने की सरल विधि
- सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को साफ करें और मां दुर्गा के सामने दीपक जलाएं।
- एक थाली में ताजे फूल, बेलपत्र और अक्षत रखें। मां दुर्गा को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
- पुरोहित के मंत्रोच्चार के साथ दोनों हाथों में फूल और बेलपत्र लें। मां दुर्गा का ध्यान करते हुए मंत्रों का जाप करें और उनके चरणों में पुष्प अर्पित करें।
- कई पूजा परंपराओं में पुष्पांजलि तीन चरणों में दी जाती है। प्रत्येक चरण में मंत्रों के साथ फूल अर्पित किए जाते हैं।
- पुष्पांजलि के बाद माता रानी की आरती करें और सुख, शांति, स्वास्थ्य तथा समृद्धि की प्रार्थना करें।
संधि पूजा से पहले पुष्पांजलि देना क्यों जरूरी माना जाता है?
धार्मिक रीति रिवाज के आधार पर सुबह की पुष्पांजलि संधि पूजा से पहले पूरी करने की सलाह दी जाती है, ताकि दोनों अनुष्ठान अपने निर्धारित समय पर किए जा सकें। संधि पूजा अष्टमी और नवमी के मिलन के समय की जाती है और इसका विशेष धार्मिक महत्व है।
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