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घर के बाहर इस दिशा में जलाएं यम का दीया, टलेगा अकाल मृत्यु का भय; जानें दीपदान के जरूरी नियम

Published: Sat, 31 Oct 2026 07:42 PM (IST)

धनतेरस पर यम का दीपक जलाने की सही विधि क्या है, किस दिशा में और किस समय जलाना चाहिए। यम ...और पढ़ें

धनतेरस पर यम दीपदान का महत्व । (Picture Credit- AI Generated)

धनतेरस पर यम दीपदान का महत्व । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धनतेरस का त्योहार सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा की जाती है। इसके साथ ही धनतेरस पर यमराज के नाम से दीपक जलाने का भी विशेष महत्व है। इसे यम दीपदान कहा जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस की शाम को यमराज के नाम का दीपक जलाने से परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यम का दीपक किस दिशा में रखना चाहिए, इसे जलाने का सही समय क्या है और इसकी पूजा कैसे करनी चाहिए? आइए जानते हैं यम दीपदान की सही विधि और जरूरी नियम।

धनतेरस पर यम का दीपक कब जलाना चाहिए?

धनतेरस के दिन यमराज के नाम का दीपक शाम के समय जलाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के बाद यानी प्रदोष काल में यम दीपदान करना शुभ माना जाता है। इसलिए शाम को घर के सभी सदस्य जब घर लौट आएं, उसके बाद यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा है। दीपक जलाने के लिए सूर्यास्त के बाद का समय चुनें।

यम का दीपक किस दिशा में रखना चाहिए?

यम दीपदान करते समय दिशा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यमराज का संबंध दक्षिण दिशा से माना जाता है। यम का दीपक घर के मुख्य दरवाजे के बाहर रखना चाहिए। दीपक की लौ दक्षिण दिशा की ओर होनी चाहिए। कुछ लोग मुख्‍य द्वार के बाईं ओर यम का दीपक रखना शुभ मानते हैं।

यम दीपक जलाने की सही विधि क्या है?

यम दीपदान के लिए मिट्टी का दीपक लेना शुभ माना जाता है। इस जलाने की विधि इस प्रकार है:

  • सबसे पहले मिट्टी का एक साफ दीपक लें।
  • दीपक के 4 मुख होने चाहिए और चारों मुखों पर बाती लगानी चाहिए।
  • इसमें सरसों का तेल या तिल का तेल डालें।
  • दीपक में रुई की 4 बातियां डालें।
  • दीपक के नीचे थोड़े अक्षत यानी साबुत चावल रखें।
  • पूजा के स्थान पर गंगाजल छिड़ककर शुद्धि करें।
  • इसके बाद दीपक जलाकर दक्षिण दिशा की ओर रखें।
  • हाथ जोड़कर यमराज से परिवार की लंबी उम्र और सुरक्षा की प्रार्थना करें।

यम दीपदान करते समय कौन-सा मंत्र बोलें?

यम दीपदान करते समय यमराज का ध्यान करके यह पारंपरिक मंत्र बोल सकते हैं:

मंत्र:

मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।

त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥

इस मंत्र का भाव है कि धनतेरस के दिन दीपदान करने से सूर्यपुत्र यमराज प्रसन्न हों और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें।

अत: धनतेरस वाले दिन बिना भूले आपको यम का दीपक जरूर जलाना चाहिए और उनसे परिवार के अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य की प्रार्थना जरूर करनी चाहिए।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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