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भूत चतुर्दशी 2026 कब है? जानें सही तिथि, दीपदान का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका धार्मिक महत्व क्या है

Published: Wed, 28 Oct 2026 04:05 PM (IST)

भूत चतुर्दशी 2026 कब मनाई जाएगी? जानें सही तिथि, दीपदान का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि। क्यों जलाए जाते हैं ...और पढ़ें

भूत चतुर्दशी के दिन 14 दीपक जलाने की परंपरा । (Picture Credit- AI Generated)

भूत चतुर्दशी के दिन 14 दीपक जलाने की परंपरा । (Picture Credit- AI Generated)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भूत चतुर्दशी हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखने वाला पर्व है। इसे खास तौर पर पश्चिम बंगाल और बिहार में होने वाली काली पूजा पर किया जाता है । इस दिन घर में 14 दीपक जलाने की मान्यता है। माना जाता है कि ऐसा करने से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। यह पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का भी एक माध्‍यम है। आइए जानते हैं भूत चतुर्दशी 2026 की सही तिथि क्‍या है? इस दिन दीपदान का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इससे जुड़ी प्रमुख परंपराएं क्‍या हैं?

भूत चतुर्दशी 2026 कब है?

साल 2026 में भूत चतुर्दशी पर चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर, शनिवार को सुबह 10 बजकर 48 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 8 नवंबर, रविवार को सुबह 11 बजकर 28 मिनट पर होगा। यह त्‍योहार 7 नवंबर को मनाया जाएगा।

भूत चतुर्दशी 2026 दीपदान का शुभ मुहूर्त

भूत चतुर्दशी के दिन शाम को दीपदान करना बहुत शुभ माना जाता है। सूर्यास्त के समय घर में दीपक जलाने और पूजा करने की परंपरा है।

चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 48 बजे शुरू होगी और दूसरे दिन 8 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 28 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इस दिन सूर्यास्त के समय शाम 5 बजकर 32 मिनट से लेकर प्रदोष काल के समाप्त होने तक शाम 7 बजकर 56 मिनट तक दीपदान किया जा सकता है।

14 दीपक जलाने की क्या है परंपरा?

भूत चतुर्दशी पर 14 दीपक जलाने की परंपरा है। बंगालियों में इसे 'चौद्दो प्रदीप' कहा जाता है। इस दिन घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल और घर के अलग-अलग कोनों में 14 दीपक जलाए जाते हैं। मान्यता है कि ये दीपक पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और घर में सकारात्मकता बनाए रखने के प्रतीक होते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि इन 14 दीपकों को चौदह पीढ़ियों के पूर्वजों की स्मृति में जलाया जाता है।

भूत चतुर्दशी की पूजा विधि

  • भूत चतुर्दशी पर पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थल की सफाई करें और देवी-देवताओं के सामने दीपक जलाएं।
  • शाम को प्रदोष काल में सरसों के तेल या घी के दीपक जलाएं। इस दिन 14 दीपक घर के अलग-अलग स्थानों पर रखें।
  • दीपक जलाने से पहले विधि से उनका पूजन करें।
  • इसके बाद भगवान से परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और सुरक्षा की प्रार्थना करें।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।