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    Vinayak Chaturthi 2023: विनायक चतुर्थी पर करें इस व्रत कथा का पाठ, विघ्नहर्ता हरेंगे सभी कष्ट

    By Suman SainiEdited By: Suman Saini
    Updated: Tue, 17 Oct 2023 12:23 PM (IST)

    Vinayak Chaturthi Vrat Katha हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य से पहले गणेश जी पूजा अवश्य की जाती है। क्योंकि गणेश जी की कृपा से सभी कार्य बिना किसी बाधा के पूरे होते हैं। आश्विन माह की विनायक चतुर्थी 18 सितंबर बुधवार के दिन मनाई जाएगी। विनायक चतुर्थी के इस व्रत के पीछे एक बड़ी ही रोचक कथा मिलती है।

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    Vinayak Chaturthi Vrat Katha विनायक चतुर्थी पर करें इस व्रत कथा का पाठ।

    नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क। Vinayak Chaturthi Vrat 2023: प्रत्येक माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी मनाई जाती है। यह दिन मुख्यतः भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के जीवन में आ रही सभी प्रकार की बाधाए दूर होती हैं। कई साधक इस दिन गणेश जी की विशेष कृपा पाने के लिए व्रत भी करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं विनायक चतुर्थी की व्रत कथा।

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    विनायक चतुर्थी व्रत कथा (Vinayak Chaturthi Vrat Katha)

    विनायक चतुर्थी की व्रत कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती और भगवान शिव एक नदी के किनारे नर्मदा नदी के किनारे बैठकर चौपड़ खेल रहे थे। तभी यह प्रश्न खड़ा हुआ कि खेल में हार-जीत का फैसला कौन करेगा। इस पर भगवान शिव ने एक कुछ तिनके एकत्रित कर उनका एक पतला बनाया और उसमें प्राण डाल दिए।

    इसके बाद भगवान शिव ने उस बालक से कहा कि हमारे इस चौपड़ के खेल में तुम्हें हार-जीत का निर्णय करना हैं। चौपड़ का खेल तीन बार खेला गया और तीनों बाद माता पार्वती जीत गईं, लेकिन जब उसे बालक से हार जीत का फैसला करने को कहा गया तो उसने भगवान शिव को विजयी बताया।

    माता पार्वती ने दिया ये श्राप

    बालक का यह निर्णय सुनकर माता पार्वती को बहुत क्रोध आया जिसके चलते उन्होंने उस बालक को अपाहिज होने का श्राप दे दिया। बाद में उस बालक ने अपनी गलती के लिए माता पार्वती से क्षमा मांगी। इस पर माता पार्वती ने कहा कि यहां गणेश जी की पूजा के लिए नागकन्या आएंगी, उनके कहे अनुसार तुम व्रत करना।

    इससे तुम श्राप से मुक्त हो जाओगे। कई समय बाद वहां नागकन्या आईं और उन्होंने गणेश जी के व्रत की विधि उस बालक को भी बताई। फिर उस बालक ने भी 21 दिनों तक भगवान गणेश का व्रत किया। इससे भगवान गणेश प्रसन्न हुए और उस बालक को श्राप से मुक्त कर दिया। मान्यताओं के अनुसार बाद में यह व्रत भगवान शिव ने भी किया।

    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'