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दशहरा के दिन क्यों निभाई जाती है शमी के पत्ते बांटने की परंपरा? रामायण और महाभारत से है इसका गहरा कनेक्शन

Published: Tue, 13 Oct 2026 10:30 AM (IST)

दशहरा पर शमी के पत्ते बांटने की परंपरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह प्रथा रामायण में ...और पढ़ें

विजयादशमी के दिन शमी के पत्तों का रहस्य (Picture Credits- AI Images)

विजयादशमी के दिन शमी के पत्तों का रहस्य (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। दशहरा हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस खास अवसर पर देशभर में रावण दहन किया जाता है। साथ ही, शमी के पत्तों को 'सोना' मानकर बांटने की एक खूबसूरत और प्राचीन परंपरा भी निभाई जाती है।

विजयादशमी के दिन लोग अपने प्रियजनों को शमी के पत्ते भेंट करते हैं और उनके पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इसे जानकर आपके मन में एक सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर विजयादशमी पर शमी के पत्तों को 'सोना' मानकर आपस में बांटने की क्या वजह है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको इसके पीछे की वजह विस्तार से बताते हैं।

दशहरा के दिन शमी के पत्ते एक-दूसरे को बांटने के पीछे कई पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यताएं हैं।

पौराणिक कथाएं

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण के साथ युद्ध करने से पहले शमी के पौधे की पूजा-अर्चना की थी। रावण का वध करने के बाद जब श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण अयोध्या लौटे थे, तो उन्होंने अयोध्या में सोने की मुद्राएं बंटवाई थीं। इसलिए आज भी उसी के प्रतीक स्वरूप दशहरा के दिन शमी की पत्तियां बांटी जाती हैं।

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने सभी अस्त्र-शस्त्र एक शमी के पेड़ पर छिपा दिए थे। अज्ञातवास समाप्त होने के बाद उन्होंने दशहरा के दिन अपने हथियार वापस लिए। साथ ही विधिपूर्वक शमी के पेड़ की पूजा-अर्चना की। इसके बाद पांडवों ने युद्ध में कौरवों पर विजय हासिल की। इसलिए शमी को शक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है।

शमी के पत्ते बांटने का महत्व

दशहरा के दिन शमी के पत्ते बांटने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दशहरे के दिन शमी की पत्तियां बांटने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही जीवन में शुभ परिणाम मिलते हैं। मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और व्यक्ति की खूब तरक्की होती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।