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    Vijaya Ekadashi 2024: विजया एकादशी के दिन करें श्री हरि स्तोत्र का पाठ, धन-दौलत में होगी बढ़ोतरी

    सनातन धर्म में एकादशी उपवास का विशेष महत्व है। फाल्गुन माह की पहली एकादशी तिथि 6 मार्च 2024 को मनाई जाएगी। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि जो जातक इस दिन भक्ति भाव के साथ पूजा-अर्चना करते हैं उन्हें मनचाहा वरदान प्राप्त होता है। इस दिन श्री हरि स्तोत्र (Shri Hari Stotram) का पाठ करना भी बेहद शुभ माना गया है।

    By Vaishnavi DwivediEdited By: Vaishnavi DwivediUpdated: Thu, 29 Feb 2024 12:44 PM (IST)
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    Shri Hari Stotram: श्री हरि स्तोत्र का पाठ

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Shri Hari Stotram: सनातन धर्म में एकादशी तिथि बेहद शुभ मानी जाती है। साल में कुल 24 एकादशी तिथियां पड़ती हैं, जो सभी जग के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। फाल्गुन माह की पहली एकादशी तिथि 6, मार्च 2024 को मनाई जाएगी।

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    इस दिन जो साधक भक्ति भाव के साथ पूजा-अर्चना करते हैं उन्हें मनचाहा वरदान प्राप्त होता है। इस दिन श्री हरि स्तोत्र का पाठ करना भी बेहद कल्याणकारी माना गया है। तो आइए यहां पढ़ते हैं -

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    ।। श्री हरि स्तोत्र।।

    जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालं

    शरच्चन्द्रभालं महादैत्यकालं

    नभोनीलकायं दुरावारमायं

    सुपद्मासहायम् भजेऽहं भजेऽहं ॥

    सदाम्भोधिवासं गलत्पुष्पहासं

    जगत्सन्निवासं शतादित्यभासं

    गदाचक्रशस्त्रं लसत्पीतवस्त्रं

    हसच्चारुवक्त्रं भजेऽहं भजेऽहं ॥

    रमाकण्ठहारं श्रुतिव्रातसारं

    जलान्तर्विहारं धराभारहारं

    चिदानन्दरूपं मनोज्ञस्वरूपं

    ध्रुतानेकरूपं भजेऽहं भजेऽहं ॥

    जराजन्महीनं परानन्दपीनं

    समाधानलीनं सदैवानवीनं

    जगज्जन्महेतुं सुरानीककेतुं

    त्रिलोकैकसेतुं भजेऽहं भजेऽहं ॥

    कृताम्नायगानं खगाधीशयानं

    विमुक्तेर्निदानं हरारातिमानं

    स्वभक्तानुकूलं जगद्व्रुक्षमूलं

    निरस्तार्तशूलं भजेऽहं भजेऽहं ॥

    समस्तामरेशं द्विरेफाभकेशं

    जगद्विम्बलेशं ह्रुदाकाशदेशं

    सदा दिव्यदेहं विमुक्ताखिलेहं

    सुवैकुण्ठगेहं भजेऽहं भजेऽहं ॥

    सुरालिबलिष्ठं त्रिलोकीवरिष्ठं

    गुरूणां गरिष्ठं स्वरूपैकनिष्ठं

    सदा युद्धधीरं महावीरवीरं

    महाम्भोधितीरं भजेऽहं भजेऽहं ॥

    रमावामभागं तलानग्रनागं

    कृताधीनयागं गतारागरागं

    मुनीन्द्रैः सुगीतं सुरैः संपरीतं

    गुणौधैरतीतं भजेऽहं भजेऽहं ॥

    फलश्रुति

    इदं यस्तु नित्यं समाधाय चित्तं

    पठेदष्टकं कण्ठहारम् मुरारे:

    स विष्णोर्विशोकं ध्रुवं याति लोकं

    जराजन्मशोकं पुनर्विन्दते नो ॥

    धन्वंतरि मंत्र:

    ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:

    अमृतकलश हस्ताय सर्वभय विनाशाय सर्वरोगनिवारणाय

    त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप

    श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥

    ॐ नमो भगवते धन्वन्तरये अमृत कलश हस्ताय सर्व आमय

    विनाशनाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णवे नमः ||

    श्री हरि विष्णु पूजन मंत्र:

    शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं,

    विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम् ।

    लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्,

    वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥

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    डिस्क्लेमर-''इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना में निहित सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्म ग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारी आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना के तहत ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'