बरगद के पेड़ का भगवान शिव से क्या है कनेक्शन, क्यों वटवृक्ष के नीचे होती है शिव की विशेष पूजा?
हिंदू धर्म में बरगद का पेड़ बेहद पवित्र है। पद्म पुराण में भगवान शिव और वटवृक्ष के गहरे संबंध का ...और पढ़ें

बरगद और भगवान शिव का अद्भुत संबंध । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में बरगद यानी वटवृक्ष को बेहद पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह वृक्ष दीर्घायु, स्थिरता, ज्ञान और अक्षय जीवन का प्रतीक है। भगवान शिव के साथ वटवृक्ष का विशेष संबंध भी बताया गया है। पद्म पुराण के उत्तर खंड के अध्याय 115 में इससे जुड़ी एक रोचक पौराणिक कथा का वर्णन मिलता है। चलिए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
माता पार्वती के श्राप से वृक्ष बने देवता
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती एकांत में थे। उसी समय देवताओं के कार्य से अग्निदेव ने ब्राह्मण का रूप धारण करके उनके एकांत में विघ्न डाल दिया। इस घटना से माता पार्वती अत्यंत क्रोधित हो गईं और उन्होंने देवताओं को पृथ्वी पर वृक्ष बन जाने का श्राप दे दिया।
इस श्राप के प्रभाव से त्रिदेव अलग-अलग वृक्षों के रूप में प्रकट हुए। कथा अनुसार भगवान विष्णु को पीपल, भगवान ब्रह्मा को पलाश और भगवान शिव को वटवृक्ष बन गए। इसी मान्यता के कारण बरगद को भगवान शिव का प्रतीकात्मक स्वरूप मानकर उसकी पूजा की जाती है।
वटवृक्ष को क्यों कहा जाता है अक्षयवट?
बरगद का पेड़ अपनी लंबी आयु और विशाल आकार के लिए प्रसिद्ध है। इसकी शाखाओं से निकलने वाली जड़ें जमीन तक पहुंचकर नए तनों का रूप ले लेती हैं। इस कारण एक ही बरगद का वृक्ष बहुत विस्तृत हो सकता है और लंबे समय तक जीवित रह सकता है। इसी विशेषता के कारण वटवृक्ष को अक्षवट कहा जाता है। भगवान शिव को भी शाश्वत और अनादि माना जाता है। इसलिए हिंदू धर्म में वटवृक्ष और महादेव के बीच एक आध्यात्मिक संबंध बताया गया है।
वटवृक्ष के नीचे क्यों होती है शिव की पूजा?
भगवान शिव की वटवृक्ष के नीचे पूजा करने के पीछे एक महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यता है, जो शिव जी के दक्षिणामूर्ति स्वरूप से जुड़ी है। दक्षिणामूर्ति भगवान शिव का गुरु रूप है, जिसमें वे मौन रहकर ऋषियों को ज्ञान प्रदान करते हैं। इसलिए वटवृक्ष के नीचे भगवान शिव की पूजा करना बहुत शुभ होता है। इससे भक्त को अनंत ज्ञान की प्राप्ति होती है।
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