भगवान श्रीकृष्ण का नीला रंग पूतना द्वारा विषपान कराने के कारण हुआ था। एक अन्य मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण के शरीर का नीला रंग कालिया नाग से युद्ध के दौरान विष के कारण हुआ था। श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु के मानव अवतार थे। उन्होंने पृथ्वी पर द्वापरयुग में अत्याचारी कंस के भांजे के रूप में जन्म लिया था।

दरअसल, कंस ने श्रीकृष्ण के माता-पिता यानी देवकी-वासुदेव को बंदीगृह में कारागृह में बंदी बना कर रखा था। कंस को एक आकाशवाणी से पता चला कि देवकी का आठवां पुत्र उसकी मौत का कारण बनेगा। तभी से कंस ने अपनी बहन देवकी और बहन के पति वासुदेव को बंदी बनाया।

संस्कृत भाषा में कृष्ण का अर्थ काला होता है। लेकिन जब कंस को पता चला कि कृष्ण का जन्म हो चुका है और वो गोकुल में है तो कंस ने कान्हा को मारने के लिए कई दैत्य भेजे। पूतना भी उन्हीं मे से एक थी। वह एक विशाल राक्षसी थी, जिसने शिशु कान्हा को दुग्धपान कराने का कहकर विषपान कराने की कोशिश की।

हालांकि वह कामयाब रही, लेकिन श्रीकृष्ण तो स्वयं भगवान हरि के अवतार थे। विष का तो उनपर कोई प्रभाव नहीं पड़ा लेकिन उनके शरीर का रंग नीला हो गया और पूतना मारी गई।

कान्हा के शरीर नीला है हमारे पौराणिक धर्मग्रंथों में इस बात को लेकर एक और कथा प्रचलित है वह यह है कि एक बार श्रीकृष्ण अपने गोप मित्रों के साथ नदी किनारे गेंद से खेल रहे थे। नदी में कालिया नाग रहता था। वह बहुत ही ज्यादा विषैला था जिसके कारण यमुना नदी का रंग काला हो गया था। खेलते समय गेंद नदी में गिर गई।

गेंद को वापिस लाने के लिए कान्हा ने नदी में छलांग लगा दी, और कालिया नाग से युद्ध कर वापिस गेंद ले आए। लेकिन कालिया नाग से युद्ध के दौरान वह उसके प्रभाव को कम न कर सके इसलिए उनके शरीर का रंग नीला हो गया।

Posted By: Preeti jha

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