दीवाली पर दांतों से सिक्का क्यों छुआते हैं सिंधी लोग? पढ़िए इस अनोखी रस्म का गहरा राज
सिंधी समाज में दिवाली को 'दीयारी' कहा जाता है और इस त्योहार पर कई खास परंपराएं निभाई जाती हैं। पूजा ...और पढ़ें

सिंधी परंपरा में दीवाली से जुड़ी अनोखी रस्म
HighLights
सिंधी दिवाली को 'दीयारी' कहते हैं, मनाते हैं धूमधाम से।
पूजा के बाद दांतों से सिक्का छूने का रिवाज है।
'लक्ष्मी आई, दानत वाइ' कहकर गरीबी दूर करते हैं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज देशभर में धनतेरस का त्योहार मनाया जा रहा है और ठीक एक दिन बाद यानी 8 नवंबर 2026 को दीवाली मनाई जाएगी। देशभर में दीवाली बेहद ही उत्साह और धूमधाम से मनाई जाती है। इस त्योहार के मौके पर कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। सिंधी समाज में भी दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा करने के साथ दीपक जलाएं जाते हैं।
सिंधी लोग हर दिवाली पर अपने दांतों पर सिक्का छुआते हैं। इस परंपरा के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक महत्व छिपा है। सिंधी लोग दीवाली को अपनी भाषा में 'दीयारी' कहते हैं। कई सिंधी परिवारों में दीवाली से लेकर भाईदूज तक हठालडी (पारंपरिक और पवित्र पूजा संरचना, जो छोटा सा घर या मंदिरनुमा ढांचा होता है) में मां लक्ष्मी और श्री गणेश की मिट्टी से निर्मित प्रतिमा को स्थापित करते हैं।

चांदी का सिक्का क्यों छुआते हैं दांतों से?
सिंधियों में दीवाली के मौके पर परिवार इक्ट्ठा होते हैं और घर में तमाम तरह के व्यंजन बनाते हैं। इसके साथ ही उनके पास देवी लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा के लिए एक खास तरह की थाली होती है जिसमें वे सिंदूर से स्वास्तिक और दूसरे धार्मिक निशान बनाते हैं।
चांदी और सोने के सिक्कों को कच्चे दूध से धोकर थाली में रखा जाता है और चावल, सिंदूर, फूल वगैरह से इसे सजाया जाता है। पूजा के दौरान इस थाली को देवी-देवताओं की मूर्तियों के सामने रखा जाता है।
पूजा खत्म होने के बाद सिंधी लोग ढेर में से एक सिक्का उठाकर उसे धीरे से अपने दांतों पर थपथपाने का रिवाज निभाते हैं। इस रस्म के दौरान 'लक्ष्मी आई, दानत वाइ' कहा जाता है, जिसका मतलब होता है कि देवी लक्ष्मी का आना गरीबी दूर करने का संकेत माना जाता है।
खास तरह के व्यंजन भी बनाए जाते हैं
इसका एक छिपा हुआ संदेश यह भी है कि धन को खत्म नहीं किया जा सकता है। मिठाई खाने के बाद सिंधी लोग मिट्टी के दीये जलाते हैं और धन की देवी मां लक्ष्मी का स्वागत करते हैं और रात भर उनके लिए घर खुले रखते हैं।
सिंधी परिवारों में दीवाली के मौके पर खासतौर पर साईं भाजी यानी 'पालक और चने की दाल की सब्जी' और सात तरह की सब्जियों वाली 'सात भाजी' के साथ चावल बनाए जाते हैं।
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