शारदीय नवरात्रि 2026 महानवमी: मां सिद्धिदात्री पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, भोग और पावन व्रत कथा
शारदीय नवरात्र की नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि पूर्वक की जाती है। अगर आप इस दिन शुभ ...और पढ़ें

महानवमी 2026: मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, मंत्र व कथा (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
मां सिद्धिदात्री को समस्त सिद्धियों की देवी माना जाता है।
महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा 19 अक्टूबर 2026 को होगी।
पूजा में सफेद फूल, घी का दीपक और तिल का भोग चढ़ाएं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र का नौवां दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित होता है जिसे माता दुर्गा के नौवें रूप के रूप में पूजा जाता है। माता को समस्त सिद्धियों को अधिकारिणी माता के रूप में पूजा जाता है और माता ज्ञान, सफलता और धन की देवी मानी जाती हैं।
शास्त्रों के अनुसार, जो भी माता का पूजन सच्चे ह्रदय से करता है उसे सभी दिनों की पूजा के सामान फल मिलता है। देवी भगवत पुराण के अनुसार भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही समस्त सिद्धियों को प्राप्त किया था और उनकी कृपा से ही शिव जी 'अर्द्धनारीश्वर' नाम से प्रसिद्ध हुए।
शारदीय नवरात्र के नौवें दिन ही नौ दिनों की पूजा के बाद कन्याओं का पूजन किया जाता है और व्रत का पारण किया जाता है। आइए आपको बताते हैं मां सिद्धिदात्री के स्वरूप से लेकर उनके प्रिय मंत्र, भोग, आरती समेत अन्य जानकारियां।
मां सिद्धिदात्री का स्वरूप
मां सिद्धिदात्री को माता दुर्गा का नौवां स्वरूप माना जाता है और इन्हें सिद्धियों की देवी के रूप में पूजा जाता है। मां का स्वरूप दिखने में अत्यंत शांत है और दिव्य है। माता के चार हाथ हैं जिनमें एक हाथ में शंख, दूसरे में चक्र, तीसरे में गदा और चौथे हाथ में अभय मुद्रा दिखाई देती है।
मां सफेद वस्त्र धारण करती हैं और मां का वाहन सिंह है। माता कमल के पुष्प पर विराजमान हैं और उन्होंने एक हाथ में कमल का फूल धारण किया हुआ है।
मां सिद्धिदात्री पूजा का शुभ मुहूर्त
- इस साल महानवमी यानी मां सिद्धिदात्री की पूजा 19 अक्टूबर, सोमवार को की जाएगी।
- महानवमी तिथि प्रारंभ: 19 अक्टूबर, सुबह 10:51 बजे
- महानवमी तिथि समापन: 20 अक्टूबर, दोपहर 12:50 बजे
- महानवमी पूजा शुभ मुहूर्त- 19 अक्टूबर 10:52 से
- अभिजीत मुहूर्त: 19 अक्टूबर, दोपहर 11:43 बजे से 12:29 बजे तक
- अमृत काल: प्रातः 20 अक्टूबर, प्रातः 06:36 बजे से प्रातः 08:21 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: 20 अक्टूबर, दोपहर 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक
मां सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व
ऐसा कहा जाता है कि नवरात्र के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा से भक्तों को सिद्धि, बुध्द, धन और ज्ञान का आशीर्वाद मिलता है। ऐसा करने से व्यक्ति की समस्त बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है। यही नहीं माता के इस स्वरूप के पूजा से नौ देवियों के एक साथ पूजन के बराबर फल मिलता है।
मां सिद्धिदात्री पूजा विधि
- शारदीय नवरात्र के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के लिए प्रातः जल्द उठकर स्नान आदि से मुक्त होकर मोरपंखी रंग के साफ वस्त्र धारण करें।
- पूजा के स्थान को साफ करें और मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा एक चौकी में लाल कपड़ा बिछाकर रखें।
- इस दिन माता को सफेद फूल अर्पित करें और धूप दिखाएं। साथ ही, घी का दीपक जलाकर माता का पूजन करें।
- मां को प्रसन्न करने के लिए उनकी पसंद का भोग लगाएं और मंत्रों का जाप करें।
- इस दिन आप मां सिद्धिदात्री की कथा अवश्य पढ़ें। कथा के बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
- पूजा के समापन के समय माता की आरती करें और अर्पित किया गया भोग समस्त परिवार के लोगों को वितरित करें।
- यदि आप कन्या पूजन करते हैं तो सबसे पहले हवन करें उसके बाद कन्याओं को श्रद्धा से बिठाकर कन्या पूजन करें।
मां सिद्धिदात्री के प्रिय भोग
यदि आप मां सिद्धिदात्री को मौसमी फल चढ़ाते हैं तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन माता को चना, पूड़ी, हलवा, खीर और नारियल की मिठाई का भोग लगाएं। इसके साथ ही मां सिद्धिदात्री को तिल का भोग लगाना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि आप माता सिद्धिदात्री को सात्विक चीजों का भोग लगाते हैं, तो उनकी कृपा सदैव बनी रहती है।
मां सिद्धिदात्री के मंत्र
स्तुति मंत्र
सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
ध्यान मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु सिद्धि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
बीज मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
मां सिद्धिदात्री की आरती
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता
तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
जब भी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,
तेरी पूजा में तो न कोई विधि है
तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है!!
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,
तुम सब काज उसके कराती हो पूरे
कभी काम उसके रहे न अधूरे!!
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया,
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली!!
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महा नंदा मंदिर में है वास तेरा,
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता
वंदना है सवाली तू जिसकी दाता!!
मां सिद्धिदात्री व्रत कथा
सृष्टि के आरंभ में चारों ओर अंधकार फैला था और सृष्टि का निर्माण बाकी था। तब भगवान शिव ने शक्ति की सर्वोच्च देवी आदि शक्ति की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति दो रूपों में प्रकट हुईं। उनका एक रूप मां सिद्धिदात्री का था। मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही भगवान शिव को आठों सिद्धियां जैसे अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व प्राप्त हुईं।
माता की कृपा से भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया और आधा शिव रूप में ही रहा, उसी समय से वो अर्धनारीश्वर कहलाने लगे। यह इस बात का प्रतीक है कि शिव और शक्ति एक दूसरे के बिना अधूरे हैं और सृष्टि का संचालन दोनों के एक साथ मिलने से ही होता है।
इस प्रकार यदि आप शारदीय नवरात्र में नौवें दिन मां सिद्धिदात्री का पूजन शुभ मुहूर्त में करने के साथ उनकी व्रत कथा कर मंत्रों का पाठ करेंगे, तो उनकी कृपा दृष्टि भक्तों पर बनी रहेगी।
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