शारदीय नवरात्र 2026: मां दुर्गा के वाहन में छिपी समय की भविष्यवाणी! किस सवारी का क्या होता है संकेत?
शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा का वाहन हर साल बदलता है, जो भविष्य के लिए विभिन्न संकेत देता है। देवी ...और पढ़ें

मां दुर्गा की सवारी से जानें भविष्य के शुभ-अशुभ संकेत (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
मां दुर्गा का वाहन आगमन के वार के अनुसार बदलता है।
हाथी पर आगमन वर्षा और सुख-समृद्धि का शुभ संकेत।
घोड़ा, नाव, पालकी की सवारी के भी होते हैं अलग संकेत।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है और इस दौरान माता दुर्गा की पूजा को विशेष रूप से फलफदायी माना जाता है। नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा विधि-विधान से होती है और लोग इस समय को एक उत्सव की तरह मनाते हैं।
हर साल माता की सवारी अलग होती है जिसमें माता कभी हाथी पर, तो कभी घोड़े पर ,कभी नांव पर तो कभी पालकी पर सवार होकर माता दुर्गा का आगमन होता है। देवी पुराण में इस बार का विस्तार से वर्णन है कि हर साल माता दुर्गा का वाहन अलग क्यों होता है। यही नहीं माता जिस सवारी में आती हैं उसके भी आपके जीवन में कई संकेत होते हैं।
इस साल शारदीय नवरात्र में माता का आगमन हाथी से हो रहा है जिसे भविष्य के लिए अत्यंत शुभ संकेत माना जा रहा है। आइए आपको बताते हैं हर साल क्यों बदलती है माता की सवारी और इसके आने वाले समय के लिए क्या संकेत मिलते हैं।
हर साल किस वाहन पर आती हैं माता दुर्गा?
देवीपुराण में मां दुर्गा के आगमन के वाहन को लेकर एक श्लोक लिखा है जिससे हर साल मां दुर्गा के आगमन के दिन के हिसाब से उनकी सवारी तय होती है। यह श्लोक है-
"शशि सूर्य गजरुढा शनिभौमै तुरंगमे।
गुरौशुक्रेच दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता॥
इस श्लोक का अर्थ है नवरात्र में माता के आगमन का वाहन वार के आधार पर निर्धारित होता है। जिसमें सोमवार और रविवार को मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। मंगलवार और शनिवार को उनका वाहन घोड़ा माना जाता है।
बुधवार को माता नाव पर सवार होकर आती हैं, वहीं गुरुवार और शुक्रवार को माता का आगमन पालकी पर होता है। इस साल शारदीय नवरात्र का आरंभ 11 अक्टूबर, रविवार को हो रहा है, इसी वजह से माता इस साल हाथी पर सवार होकर आएंगी।
हर साल मां दुर्गा की सवारी से कैसे मिलते हैं भविष्य के संकेत?
देवी पुराण के इस श्लोक के अगले हिस्से में लिखा है-
गजेश जलदा देवी क्षत्रभंग तुरंगमे।
नौकायां कार्यसिद्धिस्यात् दोलायों मरणधु्रवम्॥"
इसका अर्थ है गजेश जलदा देवी- जब मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं, तो इसे उस साल के लिए अच्छी वर्षा और सुख-समृद्धि के संकेत मिलते हैं। इसी वजह से इस साल शारदीय नवरात्र में माता के आगमन को शुभ संकेत माना जा रहा है।
क्षत्रभंग तुरंगमे- का अर्थ है जब माता दुर्गा तुरंग यानी घोड़े पर आती हैं, तो क्षत्रभंग होता है यानी कि राज्य का हरण होता है। नौकायां कार्यसिद्धिस्यात् का मतलब है जब माता नौका पर आती हैं, तब कार्यों की सिद्धि होती है। दोलायों मरणधु्रवम् यानी पालकी पर माता का आगमन मृत्यु का संकेत देता है।
हर साल माता दुर्गा की सवारी अलग होती है और उसके भविष्य के लिए कुछ संकेत भी होते हैं, जिसका असर देश दुनिया पर दिखाई देता है।
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