शारदीय नवरात्र 2026 में अखंड ज्योति के पास सो रहे हैं? भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां, वरना खंडित हो सकती है पूजा
शारदीय नवरात्र 2026 में अखंड ज्योत प्रज्वलित करने के नियम, महत्व और सावधानियां बताई गई हैं। इसमें ज्योत जलाने की ...और पढ़ें

नवरात्रि में अखंड ज्योत का महत्व

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। इस साल पितृ पक्ष के समाप्त होने के बाद से ही नवरात्र (Shardiya Navratri 2026) की शुरुआत हो जाएगी। द्रिक पंचांग के हिसाब से इस वर्ष नौ दिवसीय शारदीय नवरात्र 11 अक्तूबर 2026 से आरंभ होने जा रहा है, जिसका समापन 19 अक्तूबर 2026 विजयादशमी के मौके पर होना है।
नवरात्र के पहले दिन से ही अखंड ज्योति का विशेष महत्व माना गया है। नवरात्र के दौरान अखंड ज्योत के पास सोते समय भक्तों को कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है?
'अखंड' का मतलब है निरंतर या कभी न बुझने वाला और ज्योत का मतलब है लौ। चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के सम्मान में 9-10 दिनों तक लगातार अखंड ज्योत जलती रहती है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, यह ज्योति शुद्ध ज्ञान, बुद्धि और सृजनात्मक प्रतिभा प्रतीक है। दुर्गा सूक्तम में मां दुर्गा को एक शाश्वत अग्नि के रूप में दर्शाया गया है।
अखंड ज्योत कैसे प्रज्वलित करें?
शारदीय नवरात्र के दौरान अखंड ज्योत जलाने के लिए सबसे पहले लंबी और मोटी बाती का इस्तेमाल करें।
ज्योत जलाने के लिए आप पीतल, चांदी या मिट्टी के दीयों का इस्तेमाल करें।
पवित्र दीपक को शुद्ध तिल के तेल, सरसों के तेल या घी से भरें।
अखंड ज्योति की स्थापना एक साफ चौकी पर करना सही माना जाता है। शुभ मुहूर्त में अखंड दीप को चौकी पर स्थापित करें। देवी के दाहिनी तरफ घी का दीया और बाईं ओर तेल का दीया रखना सही माना जाता है।
अखंड ज्योत जलाते समय विशेष मंत्रों का जाप करना सही माना जाता है।
शुभं करोति कल्याणमरोग्यं धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते ॥

शारदीय नवरात्र में अखंड ज्योत से जुड़े नियम
शारदीय नवरात्र में अखंड ज्योत जलाने के लिए सबसे जरूरी परम पवित्रता, सावधानी और माता के प्रति सच्ची श्रद्धा रखनी बेहद जरूरी है।
इसके अलावा अखंड ज्योत जलाने के लिए ज्योति की लंबी इतनी रखें कि ये 9 दिनों तक पर्याप्त रूप से जलती रहे।
अखंड ज्योत में नियमित अंतराल (समय) पर घी या तेल डालते रहे। ध्यान रखें कि बाती का जलता हुआ सिरा तेल में न डूबे।
अखंड दीपक को हमेशा कांच या धातु के आवरण से ढककर रखना चाहिए।
यदि आप मिट्टी के दीपक का इस्तेमाल करते हैं, तो उसे रात भर पानी में भिगोकर रखना चाहिए, ताकि पवित्र लौ जलाते समय वह अतिरिक्त तेल या घी को अवशोषित न कर लें।
अखंड ज्योत के लिए क्या नहीं करें?
अखंड ज्योत की पवित्रता बनाए रखने के लिए उसके आसपास बच्चों को खेलने न दें।
अखंड ज्योति में ठोस घी डालने के बजाय उसे पिघला लें। शौचालय, किचन या किसी अनुचित स्थान के आसपास दीपक न जलाएं।
नवरात्र के नौ दिनों तक अखंड ज्योति को उसके स्थान से न हटाएं।
इसके अलावा घर में अगर ज्योत जल रही है, तो उस दौरान मांसाहारी भोजन, प्याज और लहसुन का सेवन करने से भी बचना चाहिए। ये सभी चीजें तामसिक स्वभाव की होती हैं। नवरात्र का असल उद्देश्य मन, शरीर, और आत्मा को शुद्ध करने के साथ गुण को बढ़ाना है।
अखंड ज्योत के सामने सोने से जुड़े नियम
शारदीय नवरात्र के दौरान बहुत से लोग रात के समय अखंड ज्योत के पास सोते हैं, ताकि ज्योत को बुझने से बचाया जा सकें। लेकिन इस दौरान कुछ खास नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।
कमरे अकेला न छोड़ें- घर में अगर अखंड ज्योत जला रहे हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि, नवरात्र के नौ दिनों तक कमरे या घर को अकेला नहीं छोड़े। ज्योत के पास किसी न किसी सदस्य का हर समय होना बेहद जरूरी है।
ज्योत की ओर सिर-पैर न रखें- यदि आप नवरात्र में अखंड ज्योत वाले कमरे में सोते हैं, तो इस बात का खास ध्यान रखें कि आपके सिर और पैर की दिशा ज्योत की ओर न हो। ज्योति के सामने पैर रखना धार्मिक नजरिए से गलत माना जाता है।
इसके अलावा जिस कमरे में ज्योत जल रहा हो, वहां सोने के लिए बिस्तर का इस्तेमाल करना भी गलत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, नवरात्र के न दिन आपको भूमि पर ही सोना चाहिए।
इसके साथ ही कमरे में साफ-सफाई के साथ-साथ सात्विकता भी बनी रहनी चाहिए। पूजा स्थान के आसपास किसी भी तरह की गंदगी अशुभ मानी जाती है।
यह भी पढ़ें- शारदीय नवरात्र 2026: घट स्थापना के बाद घर में भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां, निष्फल हो जाएगी पूरी पूजा!
यह भी पढ़ें- शारदीय नवरात्र 2026: घटस्थापना पर राशि अनुसार लगाएं ये भोग और जपें मंत्र, दूर होंगी जीवन की तमाम परेशानियां
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
