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कोजागिरी पूर्णिमा पर खीर नहीं, महाराष्ट्र में क्यों बनता है 'मसाला दूध'? पढ़ें इसके पीछे का कारण

Published: Wed, 21 Oct 2026 11:13 AM (IST)

कोजागिरी पूर्णिमा पर महाराष्ट्र में रात को चांदनी में मसाला दूध रखने और पीने की परंपरा है। यह परंपरा धार्मिक ...और पढ़ें

कोजागिरी पूर्णिमा महाराष्ट्र परंपरा

कोजागिरी पूर्णिमा महाराष्ट्र परंपरा

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल अश्विन माह में आने वाली पूर्णिमा को 'कोजगिरी पूर्णिमा' (Kojagiri Purnima 2026) के नाम से जाना जाता है। शरद ऋतु में पड़ने वाली इस पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima 2026) के नाम से भी जाना जाता है। हर साल नवरात्र और दशहरा के समाप्त होने के कुछ दिन बाद 'कोजागिरी पूर्णिमा' आती है।

पूरे भारत में इस पूर्णिमा को लोग अलग-अलग तरीके से मनाते हैं। हालांकि इस पूर्णिमा को मनाने में एक समानता (मसाला दूध या खीर) हर जगह देखने को मिलती है। महाराष्ट्र में कोजागिरी पूर्णिमा के मौके पर खीर की जगह चांद की चांदनी में मसाला दूध रखा जाता है। आइए जानते हैं इसके पीछे का असल कारण और धार्मिक महत्व के बारे में।

कोजागिरी पूर्णिमा का महत्व

इस साल कोजागिरी पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026, रविवार के दिन मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, प्राचीन समय में इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी थीं। इस दिन समुद्र मंथन के जरिए से देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं, इसलिए भी इस दिन लक्ष्मी पूजन का विधान है।

एक अन्य कथा यह भी प्रचलित है कि भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में राधा और अन्य गोपिकाओं के साथ रासलीला की थी, जिस वजह से इस दिन 'रसगरबाही' भी खेली जाती है।

कोजागिरी पूर्णिमा पर मसाला दूध की परंपरा

महाराष्ट्र में कोजागिरी पूर्णिमा के दिन रात के समय चांद की चांदनी में मसाला दूध रखने और फिर पीने की परंपरा है। यह पूर्णिमा शरद पूर्णिमा पर पड़ती है। इस समय मानसून का मौसम पूरी तरह समाप्त हो जाता है और सर्दी शुरू

हो जाती है। मौसम में आए इस बदलाव के कारण शरीर को ज्यादा ऊर्जा की जरूरत पड़ती है।

यह ऊर्जा कैल्शियम से मिलती है, जो हमें दूध से प्राप्त होती है। बहुत समय पहले से ही कोजागिरी पूर्णिमा पर दूध या दूध से बने उत्पादों का सेवन करने की प्रथा रही है। इसके अलावा दूध में सूखे मेवे, इलायची पाउडर, दालचीनी और चारौली भी मिलाई जाती है।

मसाला दूध को चांद के नीचे रखने का कारण

आयुर्वेद के मुताबिक, चांदनी रात में दूध पीना हमारे शरीर और सेहत दोनों ही नजरिए से लाभदायक माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन चांद की रोशनी अमृत की ही तरह काम करती है, ऐसे में खुले आसमान के नीचे दूध या दूध से बनी चीजों को रखने से उसमें भी यह गुण आ जाते हैं। इसलिए इस दिन चांदनी का ज्यादा फायदा उठाने के लिए दूध को चांदनी में रखा जाता है और फिर बाद में उसको पीया जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।