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    Sawan Somvar Vrat 2025: किस तरह रखें सावन सोमवार का व्रत, यहां जानें पूजा का आसान तरीका

    Updated: Sun, 13 Jul 2025 07:00 PM (IST)

    भगवान शिव को खुशहाल शादीशुदा जीवन अच्छी सेहत और मानसिक शांति के लिए भी पूजा जाता है। यदि आप यह व्रत रखना चाहते हैं तो इसे भक्ति और स्पष्टता से करने के लिए आप इस स्टेप-बाय-स्टेप गाइड का पालन कर सकते हैं। चलिए ऐस्ट्रॉलजर आनंद सागर पाठक जी (astropatri.com) से जानते हैं इस बारे में।

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    Sawan Somvar Vrat 2025: कैसे करें सावन सोमवार व्रत की तैयारी?

    आनंद सागर पाठक, एस्ट्रोपत्री। सावन का महीना हिंदू कैलेंडर में बहुत पवित्र माना जाता है, खासकर भगवान शिव के भक्तों के लिए। इस महीने के हर सोमवार (Sawan Somvar Fast Rituals)  का खास महत्व होता है। लोग, खासकर महिलाएं और अविवाहित लड़कियां, अच्छे जीवनसाथी के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए सावन सोमवार का व्रत रखती हैं।

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    रात में करें ये तैयारी -

    रविवार की रात सोने से पहले घर को, खासकर जिस जगह पूजा करनी है, अच्छे से साफ कर लें। सुबह की पूजा के लिए जरूरी सामान पहले से तैयार रखें। पूजा की सामग्री में फूल, बेलपत्र, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, फल, अगरबत्ती, दीपक, कपूर और भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग शामिल हैं।

    सुबह जल्दी उठें और स्नान करें -

    प्रयास करें कि ब्रह्म मुहूर्त (प्रात: 4–6) में उठें। स्नान के बाद साफ (हल्के रंग के) वस्त्र पहनें। आदर्श रंग सफेद या पीला हो सकता है। शांत और सकारात्मक मन से व्रत के लिए तैयार हो जाएं।

    संकल्प लें -

    पूजा शुरू करने से पहले भगवान शिव के शिवलिंग या प्रतिमा के सामने शांत मन से बैठें और संकल्प लें। संकल्प का अर्थ है पूरी भक्ति और श्रद्धा से व्रत (sawan somvar vrat puja vidhi) निभाने का पवित्र वचन देना। मन से अपनी इच्छाएं और प्रार्थनाएं भगवान शिव के चरणों में अर्पित करें।

    (Picture Credit: Freepik) (AI Image)

    अभिषेक करें -

    व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भगवान शिव को पंचामृत अभिषेक अर्पित करना है। यह आप घर पर या पास के मंदिर में कर सकते हैं।

    पहले शिवलिंग को शुद्ध करने के लिए साफ जल या गंगाजल चढ़ाएं।

    फिर पंचामृत की प्रत्येक सामग्री क्रम से चढ़ाएं -

    • a) दूध
    • b) दही
    • c) शहद
    • d) घी
    • e) शक्कर

    अंत में फिर से जल या गंगाजल से अभिषेक पूर्ण करें।

    इस दौरान “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें। मन को केंद्रित और शांत रखें।

    बेलपत्र और अन्य सामग्री अर्पित करें

    अभिषेक के बाद बेलपत्र (तीन पत्तों वाला), सफेद फूल, फल और अगरबत्ती अर्पित करें। यदि उपलब्ध हो तो धतूरा, भांग या चंदन का लेप भी चढ़ा सकते हैं। दीपक और अगरबत्ती जलाएं और कुछ समय प्रार्थना में बिताएं।

    (Picture Credit: Freepik) (AI Image)

    व्रत कथा सुनें

    सावन सोमवार व्रत की कथा पढ़ें या सुनें इसमें अक्सर ऐसे भक्त की कहानी होती है जिसकी सच्ची भक्ति से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उसकी मनोकामना पूरी की। ये कथा व्रत को समझने और भगवान शिव से भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने में मदद करती हैं। इसके बाद समय हो तो शिव चालीसा, रुद्राष्टक या लिंगाष्टक का पाठ भी करें।

    उपवास के प्रकार चुनें

    व्रत रखने के तीन सामान्य तरीके हैं -

    • क) निर्जला व्रत – पूरे दिन बिना भोजन-पानी के रहें (सिर्फ तभी जब आप स्वस्थ और उपवास के अभ्यस्त हों)।
    • ख) फलाहार व्रत – फल, दूध और पानी लें।
    • ग) क समय का व्रत – शाम को केवल एक बार सात्विक भोजन लें (बिना लहसुन, प्याज और अनाज के)।

    अपने स्वास्थ्य और सामर्थ्य के अनुसार उपयुक्त तरीका चुनें। भगवान शिव कठोर नियमों से अधिक आपकी भावना और भक्ति को महत्व देते हैं।

    शाम की पूजा और व्रत खोलना 

    शाम को व्रत खोलने से पहले फिर से छोटी पूजा करें। दीपक जलाएं, फूल या बेलपत्र चढ़ाएं और “ॐ जय शिव ओंकारा” जैसी छोटी शिव आरती गाएं। यदि एक समय का व्रत कर रहे हैं तो पूजा के बाद भोजन कर सकते हैं। पूरा दिन उपवास करने पर चंद्रमा निकलने या रात की प्रार्थना के बाद व्रत खोलें।

    व्रत जारी रखना (वैकल्पिक) 

    कई लोग सावन भर हर सोमवार (sawan somvar fast significance) यह व्रत रखना पसंद करते हैं। यदि मन से जुड़ाव महसूस करें और समय हो तो ऐसा कर सकते हैं। यह भक्ति से किया जाए तो शांति और आनंद देता है।

    अंतिम विचार -

    सावन सोमवार व्रत सिर्फ खाना न खाने का नाम नहीं है, बल्कि यह खुद को समझने और मन की नकारात्मकता छोड़ने का मौका है। यह भगवान शिव के करीब आने में मदद करता है। चाहे आप अच्छे जीवनसाथी की कामना कर रहे हों, शादी में सुख-शांति चाहते हो या बस शिव के करीब महसूस करना चाहते हों, व्रत को शुद्ध मन और पूरी एकाग्रता से करें। भगवान शिव सब सुनते हैं। वे हमेशा सुनते हैं।

    लेखक: आनंद सागर पाठक, Astropatri.com से। प्रतिक्रिया हेतु hello@astropatri.com पर लिखें।