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10 सितंबर को है सर्वपितृ अमावस्या, दीपदान करके दें पितरों को विदाई; नोट करें सही विधि और दिशा

Published: Tue, 06 Oct 2026 05:18 PM (IST)

साल 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 सितंबर को है। इस दिन दीपदान करके पितरों को विदाई दी जाती है। जानिए ...और पढ़ें

पितरों को विदाई देने के लिए दीपदान । (Picture Credit- AI Generated)

 पितरों को विदाई देने के लिए दीपदान । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पितृ पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के दिन होता है। साल 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 सितंबर को मनाई जाएगी। यह दिन उन सभी पितरों के लिए विशेष माना जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं होती है या जिनका श्राद्ध किसी कारण से उनकी तिथि पर न हो पाया हो। इस दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के साथ पितरों के लिए दीपदान करना भी बहुत शुभ होता है।

इस विषय में हमारी बातचीत एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषाचार्य चंद्रेश शर्मा से हुई। वह कहते हैं, " सर्वपितृ अमावस्या की शाम पितरों की विदाई के लिए दीपक जलाने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि दीपक की रोशनी पितरों के मार्ग को प्रकाशित करती है और उन्हें श्रद्धापूर्वक विदाई दी जाती है।"

किस दिशा में करें दीपदान?

सर्वपितृ अमावस्या पर दीपदान के लिए दक्षिण दिशा को प्रमुख माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दक्षिण दिशा का संबंध यमराज और पितरों से माना गया है। इसलिए शाम के समय पितरों के नाम का दीपक दक्षिण दिशा में जलाया जाता है।

सूर्यास्त के बाद जलाएं दीपक

पितरों के लिए दीपदान करने का सही समय सूर्यास्त के बाद माना जाता है। शाम या प्रदोष काल में स्नान आदि करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पितरों का स्मरण करते हुए दीपक जलाएं।

दीपक जलाते समय मन में अपने पितरों का ध्यान करें और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक उन्हें विदाई दें।

किस तेल का इस्तेमाल करें?

पितरों के लिए जलाए जाने वाले दीपक में सरसों का तेल या तिल का तेल इस्तेमाल करना चाहिए। इनमें से तिल के तेल का दीपक पितृ कर्मों में सबसे शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो दीपदान के लिए मिट्टी के दीपक का इस्तेमाल करें दीपक में पर्याप्त तेल डालें ताकि वह कुछ समय तक जलता रहे।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।