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    Saphala Ekadashi 2024: इस शुभ समय पर करें सफला एकादशी व्रत का पारण, मिलेगा पूजा का पूरा फल

    By Vaishnavi DwivediEdited By: Vaishnavi Dwivedi
    Updated: Sun, 07 Jan 2024 08:56 AM (IST)

    Saphala Ekadashi 2024 एकादशी का दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। इस शुभ दिन पर लोग विष्णु जी की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो लोग इस दिन भगवान विष्णु की पूजा भक्ति के साथ करते हैं तो उनकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। यह इस साल की पहली एकादशी है।

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    Saphala Ekadashi 2024: इस शुभ समय पर करें सफला एकादशी व्रत का पारण

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली।Saphala Ekadashi 2024: सनातन धर्म में एकादशी का बड़ा धार्मिक महत्व है। यह दिन श्री हरि विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। इस शुभ दिन पर, लोग भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो लोग इस दिन भगवान विष्णु की पूजा भक्ति के साथ करते हैं, तो उनकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। यह इस साल की पहली एकादशी है और लोग इसे सफला एकादशी के नाम से जानते हैं।

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    पारण का शुभ समय

    सफला एकादशी पौष माह के कृष्ण पक्ष की 11वीं तिथि यानी 7 जनवरी 2024 को मनाई जा रही है। इसका आरंभ 12:41 से होगा। साथ ही इसका समापन 8 जनवरी, 2024 - 12:46 पर होगा। वहीं जो लोग व्रत रख रहे हैं, उनके व्रत खोलने का समय 8 जनवरी प्रातः 06:34 से प्रातः 08:35 तक का है। ऐसे में व्रतियों को इसी शुभ समय पर अपना व्रत खोलना है।

    सफला एकादशी पूजा नियम

    • सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें।
    • मंदिर को साफ करें और अच्छे साफ कपड़े पहनें।
    • एक लकड़ी की चौकी लें और उस पर भगवान विष्णु की प्रतिमा और श्रीयंत्र स्थापित करें।
    • देसी गाय के घी का दीया जलाएं और पीले रंग के फूलों की माला और तुलसी पत्र अर्पित करें।
    • गोपी चंदन या हल्दी का तिलक लगाएं।
    • घर में बनी मिठाई, पंचामृत अर्पित करें।
    • ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय का 108 बार जाप करें।
    • भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाने के लिए विष्णु सहस्रनाम, श्री हरि स्तोत्रम का पाठ बेहद शुभ माना गया है।
    • अंत में भगवान विष्णु की आरती करें।
    • शाम के समय भी भगवान विष्णु की पूजा अवश्य करें।
    • सभी पूजा अनुष्ठानों को पूरा करने के बाद, अपना व्रत खोलें।
    • पारण के लिए सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
    • द्वादशी तिथि पर व्रत खोलने की मान्यता है।

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    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'