Sai Baba Chamatkar Katha: आज गुरुवार है। आज का दिन साईं बाबा को भी समर्पित है। इस दिन साईं भक्त बाबा को प्रसन्न करने के लिए व्रत करते हैं। साथ उनके चरणों में अपना शीश झुकाकर मंगल कामना की प्रार्थना भी करते हैं। लोग बाबा को प्रसन्न करने के के लिए 9, 11 या 21 गुरुवार व्रत करते हैं और आखिरी व्रत पर उद्यापन करते हैं। उद्यापन के दौरान व्रती गरीबों को खाना खिलाता है और अपनी सामर्थ्य अनुसार दान-दक्षिणा भी करता है। साईं बाबा के चमत्कारों के बारे में तो हम सभी ने सुना है। इसे लेकर कई कथाएं भी प्रचलित हैं। आज इन्हीं कथाओं में से एक कथा हम आपके लिए यहां लाए हैं। आइए पढ़ते हैं साईं बाबा के चमत्कार की कथा।

एक बार बाबा ने 3 दिन के लिए अपना शरीर छोड़ने का फैसला किया। अपना देह छोड़ने से पहले उन्होंने म्हालसापति से कहा कि अगर वो 3 दिन तक वापस न आएं तो उनके शरीर को अमुक जगह पर दफना देना। साईं बाबा ने उसे 3 दिन तक उनके शरीर की पूरी तरह से रक्षा करने के लिए कहा।यह इसके बाद धीरे-धीरे उनकी सांस थमने लगी और ऐसे ही उनके शरीर की हलचल भी बंद हो गई। यह देख सभी लोगों में यह खबर फैल गई कि साईं बाबा का देहांत हो गया। उनके शरीर की जांच डॉक्टर्स ने भी की और उन्होंने यह मान लिया कि बाबा का देहांत हो चुका है और वो शांत हो गए हैं।

लेकिन म्हालसापति नहीं माना। उसने सभी को बाबा से दूर रहने की सलाह दी। उसने कहा कि बाबा के शरीर की रक्षा करने की जिम्मेदारी मेरी है। मुझे 3 दिन तक इनके शरीर की रक्षा करनी होगी। इस बात को लेकर पूरे गांव में विवाद हो गया। लेकिन म्हालसापति पर इसका असर नहीं पड़ा। उसने बाबा के सिर को अपनी गोद में रखा और 3 दिन तक जागरण किया। उसने किसी को भी बाबा के शरीर को हाथ नहीं लगाने दिया। फिर 3 दिन बाद साईं बाबा अपने शरीर में वापस आ गए। ऐसा लगा मानो चमत्कार हो गया हो। यह देख चारों ओर हर्ष व्याप्त हो गया। 

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