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    Ravi Pradosh Vrat 2023: प्रदोष व्रत पर करें इस खास स्तोत्र का पाठ, शादी में हो रही देरी होगी समाप्त

    Parvati Stotram Benefits प्रदोष व्रत के दिन अगर शाम के समय जानकीकृतं पार्वती स्तोत्र का पाठ किया जाए तो शादी में आ रही सभी अड़चने कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाएंगी इसलिए उन भक्तों को इस खास स्त्रोत्र का पाठ (Importance Of Parvati Stotram) अवश्य करना चाहिए जो विवाह संबंधी किसी भी समस्याओं को दूर करना चाहते हैं। तो चलिए यहां पढ़ते हैं -

    By Vaishnavi DwivediEdited By: Vaishnavi DwivediUpdated: Sun, 10 Dec 2023 09:17 AM (IST)
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    Ravi Pradosh Vrat 2023: ।।जानकीकृतं पार्वती स्तोत्र।।

    धर्म डेस्क,नई दिल्ली।Ravi Pradosh Vrat 2023: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को बेहद शुभ माना जाता है। इस शुभ दिन शिव जी और देवी पार्वती की पूजा का विधान है। ऐसा कहा जाता है, जो लोग इस शुभ दिन पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं, उनके जीवन से अंधकार समाप्त होता है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस माह यह उपवास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी आज रखा जाएगा।

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    ऐसी मान्यता है कि अगर शाम के समय इस 'जानकीकृतं पार्वती स्तोत्र' का पाठ किया जाए, तो शादी में आ रही सभी अड़चने कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाएंगी, इसलिए उन भक्तों को इस खास स्त्रोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए, जो विवाह संबंधी किसी भी समस्याओं को दूर करना चाहते हैं। तो चलिए यहां पढ़ते हैं -

    ।।जानकीकृतं पार्वती स्तोत्र।।

    जानकी उवाच -

    शक्तिस्वरूपे सर्वेषां सर्वाधारे गुणाश्रये।

    सदा शंकरयुक्ते च पतिं देहि नमोsस्तु ते।।

    सृष्टिस्थित्यन्त रूपेण सृष्टिस्थित्यन्त रूपिणी।

    सृष्टिस्थियन्त बीजानां बीजरूपे नमोsस्तु ते।।

    हे गौरि पतिमर्मज्ञे पतिव्रतपरायणे।

    पतिव्रते पतिरते पतिं देहि नमोsस्तु ते।।

    सर्वमंगल मंगल्ये सर्वमंगल संयुते।

    सर्वमंगल बीजे च नमस्ते सर्वमंगले।।

    सर्वप्रिये सर्वबीजे सर्व अशुभ विनाशिनी।

    सर्वेशे सर्वजनके नमस्ते शंकरप्रिये।।

    परमात्मस्वरूपे च नित्यरूपे सनातनि।

    साकारे च निराकारे सर्वरूपे नमोsस्तु ते।।

    क्षुत् तृष्णेच्छा दया श्रद्धा निद्रा तन्द्रा स्मृति: क्षमा।

    एतास्तव कला: सर्वा: नारायणि नमोsस्तु ते।।

    लज्जा मेधा तुष्टि पुष्टि शान्ति संपत्ति वृद्धय:।

    एतास्त्व कला: सर्वा: सर्वरूपे नमोsस्तु ते।।

    दृष्टादृष्ट स्वरूपे च तयोर्बीज फलप्रदे ।

    सर्वानिर्वचनीये च महामाये नमोsस्तु ते।।

    शिवे शंकर सौभाग्ययुक्ते सौभाग्यदायिनि।

    हरिं कान्तं च सौभाग्यं देहि देवी नमोsस्तु ते।।

    फलश्रुति

    स्तोत्रणानेन या: स्तुत्वा समाप्ति दिवसे शिवाम्।

    नमन्ति परया भक्त्या ता लभन्ति हरिं पतिम्।।

    इह कान्तसुखं भुक्त्वा पतिं प्राप्य परात्परम्।

    दिव्यं स्यन्दनमारुह्य यान्त्यन्ते कृष्णसंनिधिम्।।

    श्री ब्रह्मवैवर्त पुराणे जानकीकृतं पार्वतीस्तोत्रं सम्पूर्णम्।।

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    डिस्क्लेमर- 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना में निहित सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्म ग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारी आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना के तहत ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी'।