Ramayana Katha: भगवान राम ने क्यों ली थी जल समाधि? यहां जानिए पौराणिक कथा
भगवान राम (Ramayan Katha) ने अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए कई सारे कठिन निर्णय लिए। भगवान राम त्याग और शुभता का प्रतीक हैं। उनके जीवन से लोगों को काफी कुछ सीखने को मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि जो साधक श्रीराम की पूजा सच्चे भाव से करते हैं उन्हें मुश्किल से मुश्किल समय में किसी भी तरह के संकट का सामना नहीं करना पड़ता है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान राम की पूजा का विशेष महत्व है। भगवान राम के जीवन से धर्म, न्याय और मर्यादा का पालन करने की प्रेरणा मिलती है। उनके जीवन का अंतिम अध्याय भी एक महत्वपूर्ण घटना से जुड़ा है - जल समाधि। बहुत कम लोग इस कथा के बारे में विस्तार से जानते होंगे कि आखिर किस वजह से मर्यादा पुरुषोत्तम राम (Lord Rama Life Story) ने जल समाधि ली थी? तो आइए इस आर्टिकल में जानते हैं।
रामायण कथा
रामायण के अनुसार, लंका पर विजय प्राप्त करने और अयोध्या लौटने के बाद भगवान राम (Lord Rama Katha) ने कई सालों तक कुशलतापूर्वक शासन किया। उनके राज्य में प्रजा सुखी और समृद्ध थी। हालांकि बीतते समय के साथ एक दिन यमराज भगवान राम से मिलने अयोध्या आए। उन्होंने भगवान राम के सामने एक शर्त रखी कि ''जब तक उनकी और प्रभु राम की बातचीत चलेगी, तब तक कोई भी उस कक्ष में प्रवेश नहीं करेगा।
यदि कोई ऐसा करता है, तो भगवान राम को उसे मृत्युदंड देना होगा।'' राम जी ने उनकी शर्त स्वीकार कर ली और लक्ष्मण जी को अपने द्वार पर पहरा देने का आदेश दिया।
ऋषि दुर्वासा अयोध्या पहुंचे
इसी बीच ऋषि दुर्वासा अयोध्या पहुंचे, जो अपने भारी क्रोध के लिए जाने जाते थे और उन्होंने तुरंत भगवान राम से मिलने की इच्छा व्यक्त की। लक्ष्मण जी ने विनम्रतापूर्वक उन्हें कुछ समय इंतजार करने को कहा, जिसपर दुर्वासा ऋषि बहुत क्रोधित हो गए और उन्होंने पूरी अयोध्या को श्राप देने की धमकी दी।
लक्ष्मण जी का त्याग
इस वजह से लक्ष्मण जी उस कक्ष में प्रवेश कर गए, जिसमें काल के देवता यमराज और भगवान राम बात कर रहे थे। इससे दोनों की बातचीत में विघ्न पड़ गया। अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार, भगवान राम (Why Lord Rama Took Jal Samadhi?) ने लक्ष्मण जी का त्याग कर दिया।
वहीं, लक्ष्मण जी अपने बड़े भाई की मर्यादा और अयोध्या की सुरक्षा को समझते हुए, इस निर्णय को स्वीकार कर लिया। इसके बाद उन्होंने भगवान राम से विदा ली और सरयू नदी के तट पर जाकर जल समाधि ले ली।
भगवान राम ने भी ली जल समाधि
लक्ष्मण जी के जल समाधि लेने के बाद, भगवान राम बहुत दुखी रहने लगे। उन्हें यह भी पता चल गया था कि पृथ्वी पर उनका अवतार लेने का उद्देश्य अब समाप्त हो गया है। इसके अलावा ब्रह्मा जी और अन्य देवताओं ने उनसे अपने धाम वापस लौटने को कहा।
तब भगवान राम ने भी सरयू नदी में प्रवेश किया और जल समाधि ले ली। इस तरह भगवान राम अपनी सांसारिक लीला को समाप्त कर बैकुंठ धाम वापस लौट गए।
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