पितृ पक्ष 2026: इस साल 16 की जगह 15 दिन होंगे श्राद्ध, तिथियों के इस खेल के पीछे छिपा है बड़ा धार्मिक कारण
पितृ पक्ष 2026 में 16 की जगह 15 दिनों का होगा, जिसका मुख्य कारण 'तिथि क्षय' है। यह अवधि घटने ...और पढ़ें

इस बार तिथि क्षय के कारण 16 की जगह 15 दिन होंगे श्राद्ध कर्म । (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पितृ पक्ष हिंदू धर्म में पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष पर्व माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। आमतौर पर पितृ पक्ष की अवधि 16 दिनों की मानी जाती है। हालांकि, पंचांग की गणना के अनुसार कुछ वर्षों में तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण इसकी अवधि 15 दिन या फिर इससे ज्यादा भी हो सकती है। वर्ष 2026 में 26 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो रहे हैं और इस बार 15 दिन ही श्राद्ध मनाए जाएंगे। तो चलिए जानते हैं इसके पीछे का धार्मिक महत्व क्या है।
तिथि के कारण बदल जाती है पितृ पक्ष की अवधि
हिंदू पंचांग में तिथियों की गणना सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर की जाती है। चंद्रमा की गति एक समान नहीं होती, इसलिए कई बार कोई तिथि बहुत कम समय के लिए रहती है। ऐसी स्थिति में वह तिथि एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाती है। इसे तिथि क्षय कहा जाता है। जब पितृ पक्ष के दौरान किसी तिथि का क्षय हो जाता है, तो 16 अलग-अलग तिथियों के बजाय श्राद्ध कर्म 15 दिनों में ही पूरे हो जाते हैं, जैसा कि इस बार हो रहा है।
एक दिन पड़ सकते हैं दो श्राद्ध
तिथि क्षय होने की स्थिति में किसी एक दिन दो तिथियां आ सकती हैं। उदाहरण के लिए, यदि एक तिथि सूर्योदय के बाद शुरू होकर उसी दिन समाप्त हो जाए और अगली तिथि भी उसी दिन आ जाती है, तो पंचांग में दोनों तिथियों का संयोग बन जाता है। ऐसे में संबंधित दोनों तिथियों के श्राद्ध कर्म एक ही दिन किए जा सकते हैं, मगर अलग-अलग मुहूर्तों पर यह श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। यही कारण है कि पितृ पक्ष की अवधि कभी-कभी 16 के बजाय 15 दिनों की भी हो जाती है।
क्या 15 दिन का पितृ पक्ष अशुभ माना जाता है?
पितृ पक्ष के दिनों की संख्या कम होने का अर्थ यह नहीं है कि श्राद्ध कर्म का महत्व कम हो गया। तिथियों का घटना-बढ़ना पंचांग और खगोलीय गणना से जुड़ा होता है। मुहूर्त के हिसाब से जो तिथि जब पड़ती है, उसमें पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है। यदि किसी वर्ष तिथि क्षय के कारण पितृ पक्ष 15 दिनों का हो जाए, तो भी पितरों के लिए किए जाने वाले तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म अपनी तिथि के शुरू होने अनुसार ही किए जाते हैं।
2026 में क्या है स्थिति?
वर्ष 2026 के पितृ पक्ष 15 दिन के पड़ रहे हैं। इस पर्व की शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा से होगी और समापन सर्वपितृ अमावस्या पर होगा। इस बार पंचमी और चतुर्थी दो तिथियां एक ही दिन पड़ रही हैं। इसलिए 2026 में केवल 15 दिन के श्राद्ध पड़ रहे हैं।
शनिवार के दिन पितृ पक्ष शुरू और खत्म होने का महत्व
शनिवार को शुरू होकर शनिवार को समाप्त होने वाला श्राद्ध पक्ष धार्मिक दृष्टि से बहुत ही लाभकारी हो सकता है। क्योंकि शनिवार का दिन भगवान शनि को समर्पित होता है। शनिदेव को कर्म और न्याय का कारक माना जाता है। जो लोग पितरों के प्रति सम्मान जताते हैं और श्रद्धा से उनका श्राद्ध कर्म करते हैं, शनि देव की कृपा हमेशा उन पर बनी रहती हैं। इस दिन आप पितरों और शनि देव दोनों के नाम का दान जरूरतमंदों को कर सकते हैं।
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