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पितृ पक्ष 2026: जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह के बाहर ही क्यों होता है पिंडदान? इसके पीछे का रहस्य हैरान कर देगा

Published: Thu, 24 Sep 2026 03:43 PM (IST)

जगन्नाथ पुरी को श्राद्ध पक्ष (Pitru Paksha 2026) के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है, जहां पिंडदान करने से ...और पढ़ें

जगन्नाथ पुरी में पूर्वजों के लिए मोक्ष

जगन्नाथ पुरी में पूर्वजों के लिए मोक्ष

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में श्राद्ध केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता जाहिर करने का एक पवित्र माध्यम है। पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2026)की पवित्र अवधि के दौरान हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति और उत्थान के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

इस दौरान जल द्वारा तर्पण और भोजन द्वारा पिंडदान किया जाता है। सनातन धर्म से जुड़ी मान्यताओं के मुताबिक, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा शांत होती है और अपना आशीर्वाद प्रदान करती है।

पितृ पक्ष 2026 में कब 

इस साल पितृ पक्ष (जिसे श्राद्ध पक्ष भी कहते हैं) की शुरुआत 26 सितंबर 2026, शनिवार को पूर्णिमा श्राद्ध से शुरू होकर 10 अक्टूबर, 2026 को सर्वपितृ अमावस्या को समापन होगा।

श्राद्ध पक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान करने के लिए देशभर के पवित्र तीर्थ स्थलों पर पहुंचते हैं। इस दौरान कई लोग ओडिशा के जगन्नाथ पुरी भी आते हैं।

पुरी में श्राद्ध का महत्व

महानदी और भार्गवी नदी के संगम पर बसा है जगन्नाथ पुरी का मंदिर, जो भारत के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि यह पवित्र स्थल हिंदू तीर्थयात्रियों का गंतव्य है, जो यहां स्नान करके अपने सांसारिक पापों से मुक्ति पाते हैं। इसके अलावा पुरी जगन्नाथ दिवंगत आत्माओं के लिए श्राद्ध करने के लिए पसंदीदा स्थान है।

ऐसा माना जाता है कि पुरी में श्राद्ध करने से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी वजह से हर साल आश्विन महीने के दौरान हजारों श्रद्धालु पुरी दर्शन के लिए आते हैं। पुरी में श्राद्ध जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह के अंदर नहीं, बल्कि बाहर किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि यमशिला की उपस्थिति के कारण पितृपुरुष (पूर्वजों की आत्माएं) मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकती हैं। इसके अलावा पुरी में दीवाली के दौरान पारंपरिक रूप से पाया श्राद्ध भी किया जाता है। यह एक बेहद ही खास महत्वपूर्ण श्राद्ध है और सिर्फ पुरी में ही किया जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।