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पितृ पक्ष 2026: गया में पिंडदान करने से आखिर कितनी पीढ़ियों को मिलेगा मोक्ष? गरुड़ पुराण में छिपा है इसका रहस्य

Published: Sat, 03 Oct 2026 11:12 AM (IST)

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष के दौरान बिहार के गया में पिंडदान का विशेष महत्व है, जिससे पितरों को मोक्ष ...और पढ़ें

गया में पिंडदान करने से मृतक की आत्मा को मिलती है शांति (Picture Credit- AI Generated)

गया में पिंडदान करने से मृतक की आत्मा को मिलती है शांति (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पितरों को प्रसन्न करने के लिए पितृ पक्ष की अवधि को अधिक शुभ माना जाता है। गरुड़ पुराण और वायु पुराण के अनुसार, बिहार के गया जिले में पितरों का पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पर विधिपूर्वक श्राद्ध और पिंडदान करने से मृतक की आत्मा को जन्म-मरण के चक्र से छुटकारा मिलता है और उसे शांति प्राप्त होती है। पितृ पक्ष के दौरान दूर-दूर से भारी संख्या में लोग गया पहुंचते हैं।

इस पवित्र भूमि को पितृ तीर्थ कहा जाता है। गया में भगवान विष्णु को समर्पित विष्णुपद मंदिर है। इस मंदिर में पितरों का पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति प्राप्त होती है। क्या आपने कभी सोचा है कि पितृ पक्ष के दौरान गया में पिंडदान करने से कितनी पीढ़ियों का उद्धार होता है? ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।

कितनी पीढ़ियों का होता है उद्धार?

गरुड़ पुराण में बताया गया है कि पितृ पक्ष के दौरान गया में सच्चे मन से पिंडदान करने से 7 पीढ़ियों के पूर्वजों का उद्धार होता है। रामायण के अनुसार, वनवास के दौरान माता सीता ने गया स्थित फल्गु नदी के तट पर राजा दशरथ का पिंडदान किया था। यह एक ऐसी पवित्र भूमि है, जहां पितृ पक्ष के दौरान बड़ी संख्या में पितरों का पिंडदान किया जाता है।

मान्यता के अनुसार, जिन लोगों की अकाल मृत्यु हुई हो या जिनका कोई तर्पण करने वाला न हो, तो उनका गया में पितृ पक्ष के दौरान पिंडदान करने से उन्हें प्रेत योनि से छुटकारा मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पितृ दोष होता है दूर

अगर आप जीवन में पितृ दोष की समस्या का सामना कर रहे हैं, तो पितृ पक्ष में गया जाकर पितरों का विधि-विधान से तर्पण करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पवित्र भूमि पर तर्पण करने से पितर प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष की समस्या से छुटकारा मिलता है। साथ ही व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं भी दूर होती हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गया को 'पितृ तीर्थ' भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस भूमि पर भगवान विष्णु गदाधर रूप में प्रकट हुए थे। विष्णुपद मंदिर में उनके चरण चिह्नों पर पिंडदान करने से पितरों का पूर्ण उद्धार होता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।