Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Phulera Dooj 2024: इस दिन मनाया जाएगा फुलेरा दूज, जानिए पूजन नियम

    इस साल फुलेरा दूज (Phulera Dooj 2024) 12 मार्च 2024 को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह दिन विवाह के लिए सबसे शुभ माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस विशेष दिन कृष्ण ने पानी और रंगों के बजाय फूलों की होली खेली थी। मुख्य रूप से यह पर्व मथुरा बृज और वृन्दावन में मनाया जाता है। आइए इस दिन से जुड़े कुछ नियमों को जानते हैं -

    By Vaishnavi DwivediEdited By: Vaishnavi DwivediUpdated: Thu, 29 Feb 2024 02:47 PM (IST)
    Hero Image
    Phulera Dooj 2024: फुलेरा दूज 2024 तिथि और समय

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Phulera Dooj 2024: फुलेरा दूज हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह 12 मार्च, 2024 को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह दिन विवाह के लिए सबसे शुभ माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस विशेष दिन कृष्ण ने पानी और रंगों के बजाय फूलों की होली खेली थी।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    मुख्य रूप से यह पर्व मथुरा, बृज और वृन्दावन में मनाया जाता है। सुखी जीवन का आशीर्वाद पाने के लिए भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान कृष्ण के साथ देवी राधा की पूजा करते हैं।

    फुलेरा दूज 2024 तिथि और समय

    हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि की शुरुआत 11 मार्च को प्रात: 10 बजकर 44 मिनट से हो रही है। वहीं इसका समापन 12 मार्च, 2024 को प्रात: 07 बजकर 13 मिनट पर होगा। उदया तिथि का ध्यान रखते हुए यह पर्व 12 मार्च दिन मंगलवार को मनाया जाएगा।

    फुलेरा दूज पूजन नियम

    इस दिन भक्त घरों को फूलों और रंगोली से सजाते हैं। इसके बाद भगवान कृष्ण को भोग लगाने के लिए मिठाइयां तैयार करते हैं। इस दिन का सबसे लोकप्रिय व्यंजन पोहा है, जिसे लोग प्रसाद के रूप में वितरित करते है। ऐसा कहा जाता है कि इस अवसर पर राधा-कृष्ण अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। वृन्दावन में भक्त आमतौर पर राधा-कृष्ण के प्रेम को व्यक्त करने के लिए फूलों की वर्षा करते हैं।

    अबूझ मुहूर्त का महत्व

    इस दिन को अबूझ मुहूर्त के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है कि कोई भी शुभ कार्य बिना पंचांग देखे शुरू किया जा सकता है। इस दिन राधा-कृष्ण प्रसन्न मुद्रा में होते हैं, जिस वजह से भक्तों को उनका विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    यह भी पढ़ें: Mahashivratri 2024: महाशिवरात्रि पर इन बातों का रखें ध्यान, बरसेगी भोलेनाथ की कृपा

    डिस्क्लेमर-''इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना में निहित सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्म ग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारी आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना के तहत ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'