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    Paush Purnima 2024: पौष पूर्णिमा पर स्नान दान का है विशेष महत्व, मिलते हैं अनेकों लाभ

    Updated: Tue, 23 Jan 2024 11:13 AM (IST)

    Paush Purnima 2024 Tithi 25 जनवरी को साल 2024 की पहली पूर्णिमा मनाई जाएगी। कई पुराणों में वर्णन मिलता है कि पौष महीने की पूर्णिमा साधक को मोक्ष की प्राप्ति करवा सकती है। इसके साथ ही शास्त्रों में पौष पूर्णिमा की बड़ी महिमा बताई गई है। ऐसे में आइए जानते हैं कि पौष पूर्णिमा पर स्नान-दान का क्या महत्व है।

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    Paush Purnima 2024 जानिए पौष पूर्णिमा पर स्नान दान महत्व।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Paush Purnima 2024 Date: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि, जगत के पालनहार, भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। ऐसे में इस तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विधान है। इसके साथ ही पूर्णिमा तिथि पर स्नान-दान का भी विशेष महत्व है। कई साधक इस तिथि पर व्रत आदि भी करते हैं।

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    पूर्णिमा तिथि का शुभ मुहूर्त (Purnima Shubh muhurat)

    पौष माह की पूर्णिमा तिथि का प्रारम्भ 24 जनवरी 2024 को रात 09 बजकर 49 मिनट पर हो रहा है। वहीं, इस तिथि का समापन 25 जनवरी को रात्रि 11 बजकर 23 मिनट पर हो रहा है। ऐसे में पौष पूर्णिमा 25 जनवरी गुरुवार के दिन मनाई जाएगी।

    पौष पूर्णिमा का महत्व

    हिंदू धर्म में पौष पूर्णिमा के दिन उदया तिथि में स्नान-दान करने का बड़ा महत्व माना गया है। इस दिन सूर्यदेव के साथ चंद्रदेव की भी पूजा करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन स्नान, दान और धर्म-कर्म के कार्यों को करने से साधक को पुण्य फलों की प्राप्ति हो सकती है। पौष मास में तीर्थ स्नान का भी बहुत महत्व माना गया है।

    मिलते हैं ये लाभ

    पौष पूर्णिमा के दिन यदि आप व्रत कर रहे हैं, तो आपको प्रातःकाल उठकर नदी आदि में स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से साधक को शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। वहीं, अगर कोई व्यक्ति पौष पूर्णिमा के दिन पितरों के लिए श्राद्ध कर्म करने से पितरों को मुक्ति मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा के दिन तीर्थ स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के बाद व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    करें ये काम

    पौष पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए और पवित्र नदी या अपने आसपास किसी नदी में भगवान का ध्यान करते हुए स्नान आदि करना चाहिए। जो साधक पूरे माघ मास के लिए स्नान का संकल्प करते हैं, वह अपने स्नान का प्रारम्भ पौष पूर्णिमा से शुरू कर देते हैं, जो माघी पूर्णिमा तक चलता है। ऐसे में पौष पूर्णिमा के दिन ही माघ स्नान का संकल्प ले लेना चाहिए। इसके साथ ही अपने सामर्थ्य अनुसार, गरीबों और जरूरतमंदों को दान आदि भी करना चाहिए।

    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'