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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 30, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

इंदौर के नजदीक है परशुराम का जन्मस्थान?

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Published: Wed, 30 Apr 2014 11:50 AM (GMT+05:30)Updated: Wed, 30 Apr 2014 11:51 AM (GMT+05:30)

यहां से कुछ ही दूरी पर स्थित है जानापाव एक किंवदंती के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था।

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मध्यप्रदेश के इंदौर के पास स्थित है महू यहां से कुछ ही दूरी पर स्थित है जानापाव एक किंवदंती के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। यहां पर परशुराम के पिता ऋर्षि जमदग्नि का आश्रम था।

कहते हैं कि प्रचीन काल में इंदौर के पास ही मुंडी गांव में स्थित रेणुका पर्वत पर माता रेणुका रहती थीं। भगवान परशुराम बचपन में ही शिक्षा ग्रहण करने के लिए कैलाश पर्वत चले गए थे। जहां भगवान शंकर और माता पार्वती ने उन्हें पुत्र के समान रखा और शस्त्र-शास्त्र का ज्ञाता बनाया।

कैसा है जनापाव

पवित्र तीर्थ जानापाव से दो दिशा में नदियां बहतीं हैं। यह नदियां चंबल में होती हुईं यमुना और गंगा से मिलती हैं और बंगाल की खाड़ी में जाता है। कारम में होता हुआ नदियों का पानी नर्मदा में मिलता है। यहां 7 नदियां चोरल, मोरल, कारम, अजनार, गंभीर, चंबल और उतेड़िया नदी मिलती हैं। हर साल यहां कार्तिक और क्वांर के माह में मेला लगता है।

हो जाती हैं बाधाएं दूर

ऐसी मान्यता है कि ब्रह्मकुंड में बाहरी बाधा से पीड़ित लोग आकर स्नान करते हैं और ठीक हो जाते हैं। प्राचीन समय से यहां संत रहते आ रहे हैं। यह स्थान मुंबई -आगरा राजमार्ग राजपुरा कुटी से 5.20 किमी पूर्व में है। विशेष, पर्वों में यहां दूर-दूर से लोग आते हैं। भगवान परशुराम की जयंती प्रतिवर्ष अक्षय तृतीय पर मनाई जाती है।