हमारी संस्कृति में मंदिरों का क्या महत्व है ये तो हम सभी जानते हैं। हर मंदिर का अपना महत्व होता है और कुछ ऐसा ही केरल राज्य के तिरुअनन्तपुरम में स्थित भगवान विष्णु के प्रसिद्ध पद्मनाभस्वामी मंदिर के साथ भी है। कहा जाता है कि जहां मंदिर बना है वहां भगवान विष्णु की प्रतिमा प्राप्त हुई थी जिसके चलते यहां मंदिर का निर्माण किया गया। इस मंदिर को सबसे अमीर मंदिरों में से एक माना जाता है। यहां लोग दूर-दूर से विष्णु जी के दर्शन करने आते हैं। तो चलिए जानते हैं कि आखिर इस मंदिर की मान्यता क्या है और किसने कराया था मंदिर का निर्माण।

क्यों प्रसिद्ध है पद्मनाभस्वामी मंदिर: यहां भगवान विष्णु के भक्त हाजरी लगाने आते हैं। मान्यता है कि इस स्थान पर विष्णु भगवान की प्रतिमा प्राप्त हुई थी जिसके बाद उसी स्थान पर इस मंदिर का निर्माण किया गया है। इस मंदिर के गर्म कक्ष में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति स्थापित है। इसी प्रतिमा को देखने के लिए लोग दूर-दराज से आते हैं। यहां पर भगवान विष्णु शेषनाग की शयन मुद्रा में स्थित हैं। ऐसा माना जाता है कि विष्णु भगवान के अंनत नामक नाग के नाम पर इस मंदिर का नाम रखा गया है। यहां पर एक सोने का स्तंभ भी बना हुआ है। यह बेहद खूबसूरत है। यह मंदिर भगवान विष्णु के 108 पवित्र मंदिरों में से एक है। यहां पर भगवान विष्णु भुजंग सर्प अनंत पर लेटे हुए हैं।

ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में पुरुष सिले हुए वस्त्र पहनकर प्रवेश नहीं कर सकते हैं। क्योंकि वस्त्र सिलने के बाद अशुद्ध हो जाते हैं। इसलिए यहां बिना सिला हुआ वस्त्र पहना जाता है। पद्मनाभ स्वामी मंदिर में पुरुषों को मुंडु पहनना होता है। यह एक प्रकार की धोती होती है। साथ ही स्त्रियों को भी मुंडु पहननी होती है। इन्हें बिना पहने पुरुष और स्त्री इस मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते हैं।

पद्मनाभस्वामी मंदिर की प्रतिमा: इस प्रतिमा को 12008 शालिग्राम से बनाया गया है जिन्हें नेपाल की नदी गंधकी के किनारों से लाया गया था। विष्णु जी की प्रतिमा 18 फीट लंबी है। इस मंदिर का गर्भगृह एक चट्टान के ऊपर स्थित है। इस प्रतिमा को देखने के लिए कई दरवाजे मौजूद हैं।  

Posted By: Shilpa Srivastava

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