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    Narad muni: दो घड़ी से ज्यादा एक जगह क्यों नहीं ठहरते थे नारद, जानिए क्या मिला था श्राप

    By Suman SainiEdited By: Suman Saini
    Updated: Tue, 18 Jul 2023 01:53 PM (IST)

    Narad Muni देवर्षि नारद ब्रह्मा जी के 7 मानस पुत्रों में से एक माने गए हैं। देवताओं का ऋषि होने के कारण इन्हें देवर्षि नाम मिला है। नारद मुनि भगवान विष्णु के अनंत भक्त हैं। वह हमेशा नारायण-नारायण जपते रहते हैं जो भगवान विष्णु का ही एक नाम है। वह धर्म के प्रचार तथा लोक-कल्याण के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहते हैं।

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    Narad muni नारद मुनि को क्या श्राप मिला था।

    नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क। Narad Muni: नारद मुनि ब्रह्माजी के पुत्र हैं। नारद मुनि का महत्व इतना है कि उनका आदर सत्कार देवी-देवता द्वारा तो किया ही जाता था। लेकिन असुरलोक के राजा समेत सारे राक्षसगण भी उन्हें सम्मान दिया करते थे। लेकिन क्या आप कि उन्हें भी एक श्राप मिला था जिसके कारण वह एक जगह नहीं ठहर पाते।

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    क्यों कहा जाता है समाचार का देवता

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नारद मुनि ब्रह्मा जी की गोद से पैदा हुए थे। ब्रह्मा जी का पुत्र बनने के लिए उन्होंने कड़ी तपस्या की थी। वह सृष्टि के पहले संदेश वाहक यानी पत्रकार भी माने जाते हैं। देवर्षि नारद को समाचार के देवता भी कहा जाता है। क्योंकि वह हमेशा तीनो लोकों में भ्रमण कर सूचनाओं का आदान-प्रदान करते थे।

    राजा दक्ष ने दिया था ये श्राप

    नारद मुनि के एक जगह न टिकने के पीछे राजा दक्ष द्वारा दिया गया श्राप है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा दक्ष के 10 हजार पुत्र थे जिन्हें नारद जी से मोक्ष की शिक्षा देकर राजपाठ से विरक्त कर दिया। बाद में दक्ष ने पंचजनी से विवाह किया और उनके एक हजार पुत्र हुए।

    नारद जी ने दक्ष के इन पुत्रों को भी मोह-माया से दूर रहकर मोक्ष की राह पर चलना सिखाया। जिस कारण इनमें से किसी ने भी दक्ष का राज-पाट नहीं संभाला। इस बात पर राजा दक्ष बहुत क्रोधित हुए और इसी के चलते उन्होंने नारद जी को श्राप दे दिया कि तुम हमेशा इधर-उधर भटकते रहोगे और एक स्थान पर दो घड़ी से ज्यादा समय तक नहीं ठहर सकोगे।

    पिता से भी मिला था श्राप

    नारद मुनि को अपने पिता ब्रह्मा जी से भी एक श्राप मिला है। मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा जी ने नारद मुनि को सृष्टि के कामों में उनका हाथ बटाने और विवाह करने के लिए कहा था लेकिन नारद जी ने अपने पिता की आज्ञा का पालन करने से इंकार कर दिया था। जिसके चलते ब्रह्मा जी ने उन्हें श्राप दिया कि तुम आजीवन अविवाहित रहोगे।

    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'