Motivational Story In Hindi: कहानियां हमें काफी कुछ सीखाती हैं। अगर हम जिंदगी की किसी मुसीबत में फंस जाते हैं तो कई बार कहानियां हमें इनसे निकलने की सीख देती हैं। कई बार हम सोचते हैं कि अगर हम अपने घर की जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाएं तो जीवन में जल्दी प्रगति कर लेंगे लेकिन ऐसा नहीं होता है। हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारे जीवन में घर और परिवार की क्या अहमियत है। आज की कहानी इसी सीख पर आधारित है। आइए पढ़ते हैं आज की प्रेरक कहानी।

यह कहानी बाप-बेटे की है। एक बार एक व्यक्ति अपने बेटे के साथ पतंग उत्सव में गया था। इस उत्सव में लोग रंग-बिरंगी पतंगें उड़ा रहे थे। यह देख उस व्यक्ति का बेटा बेहद खुश हो गया। उसका मन भी पतंग उड़ाने को करने लगा। इसने अपने पिता से कहा, “पापा, मैं भी पतंग उड़ाना चाहता हूं। मुझे भी पतंग खरीद दीजिए।” बेटे की इच्छा जान उसका पिता दुकान में गया और पतंग और डोरी खरीद लाया। उसका बेटा पतंग देख बेहद खुश हो गया।

उसका बेटा कुछ देर तक पतंग उड़ाता रहा। उसकी पतंग बहुत ऊंची उड़ रही थी लेकिन वो इससे खुश नहीं था। वो चाहता था कि उसकी पतंग और ऊंची उड़े। उसने अपने पिता से कहा, “पापा, ऐसा लग रहा है कि इस जोर की वजह पतंग ज्यादा ऊंची नहीं उड़ पा रही है। अगर मैं इसकी डोर काट दूं तो यह पतंग आजाद होकर और ऊंची उड़ने लगेगी।” बच्चे ने अपने पिता से जिद्द की कि वो उसकी पतंग की डोर काट दे।पिता ने उसकी बात मानी और पतंग की डोर काट दी। डोर कटते ही पतंग और ऊंची उड़ने लगी। यह देख बच्चा बेहद खुश हुआ।

लेकिन कुछ देर तक तो पतंग ऊंची उड़ी लेकिन फिर वो एक मकान की छत पर जा गिरी। यह देख बच्चा हैरान हो गया। क्योंकि पतंग की डोर काटने के बाद भी वो नीचे गिर गई थी। उसने अपने पिता से पूछा, “पापा, ये क्या हुआ? पतंग नीचे क्यों गिर गई। इसे तो आसमान में और ऊंचा जाना था।” तब उसके पिता ने उसे समझाया कि अगर तुम्हें यह लग रहा था कि डोर पतंग को ऊंचा उड़ने से रोक रही थी तो ऐसा नहीं था। डोर पतंग का सहारा दे रही थी। हवा की गति अनुसार डोर खींचकर या उसे ढील देकर पतंग को ऊंचा उड़ने में मदद मिल रही थी।

लेकिन जब डोरी को काट दिया गया तब पतंग को मदद मिलनी बंद हो गई। इससे पतंग नीचे गिर पड़ी। ठीक ऐसा ही जीवन में भी होता है। जब व्यक्ति जीवन की ऊंचाईयों पर पहुंच जाता है तब उसे लगता है कि उसका परिवार उसे डोरी की तरह पकड़े हुए है और उसे सफलता की ऊंचाईंयों पर पहुंचने से रोक रहे हैं। लेकिन हम यह कैसे भूल जाते हैं कि हमारा परिवार ही है जो हमें इन ऊंचाईयों पर ले जाता है। परिवार द्वारा दिया जाने वाला नैतिक बल ही हमें सफलता दिलाता है। यह सुन उस बच्चे को उसकी गलती समझ आई।

सीख: कई बार हम सोचते हैं कि अगर हम अपने घर की जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाएं तो जीवन में जल्दी प्रगति कर लेंगे लेकिन ऐसा नहीं होता है। हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारे जीवन में घर और परिवार की क्या अहमियत है। परिवार ही है जो हमें जीवन में आगे बढ़ने में मदद करता है। हमारा परिवार ही हमें प्रेरित करता है।

 

Edited By: Shilpa Srivastava