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क्या आप भी महाकाली और भद्रकाली को समझते हैं एक? जानें दोनों देवियों के उत्पत्ति की कथा

Published: Sat, 21 Mar 2026 12:30 PM (IST)

देवी काली के चार प्रमुख दक्षिणा काली, श्मशान काली, भद्रकाली और महाकाली रूप हैं। कई लोग महाकाली और भद्रकाली को एक ही समझने की भूल करते हैं।

difference between Mahakali and Bhadrakali (AI Generated Image)

difference between Mahakali and Bhadrakali (AI Generated Image)

HighLights

  1. मां काली का ही स्वरूप हैं महाकाली और भद्रकाली

  2. दोनों देवियों की उत्पत्ति और स्वरूप में भिन्नता है

  3. भक्तों की रक्षा करने वाली कल्याणकारी देवी हैं भद्रकाली

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव यदि काल हैं और उनकी पत्नी काली हैं। इसलिए मां काली (Kali Mata) को समय, शक्ति, विनाश और मृत्यु की देवी कहा जाता है। महाकाली और भद्रकाली आदिशक्ति के दोनों ही देवी काली के स्वरूप हैं। लेकिन दोनों के स्वरूप और उत्पत्ति में अंतर है, जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

मां महाकाली (Mahakali)

देवी का महाकाली स्वरूप समय और मृत्यु से परे और अनंत शक्ति का स्वरूप गया जाता है। महाकाली समय, मृत्यु और विनाश (अहंकार का) की आदि शक्ति हैं, जो रौद्र रूप में असुरों का संहार करती हैं। साथ ही वह आदिशक्ति का उग्र और जागृत स्वरूप हैं। श्रीदुर्गा सप्तशती और श्रीमार्कण्डेय पुराण आदि में वर्णित कथा के अनुसार, जब देवता और असुरों का युद्ध हो रहा था, तब असुर, देवताओं पर भारी पड़ रहे थे।

तब देवी दुर्गा के क्रोध से महाकाली प्रकट हुईं और उन्होंने शुम्भ-निशुम्भ और चंड-मुंड जैसे असुरों का संहार किया। महाकाली संपूर्ण सृष्टि की आरंभ और अंत की शक्ति भी मानी जाती हैं।

Maa Kali ग

(Picture Credit: Freepik)

मां महाकाली का स्वरूप

मां काली का स्वरूप अत्यंत उग्र, दिव्य और विनाशकारी है। वह गर्दभ (गधा) की सवारी करती हैं और 52 मुंडों की माला धारण करती हैं। उनके 4 में हैं जिसमें खड्ग, त्रिशूल, कटे मुंड, और खप्पर (पात्र या कटोरा) है। लेकिन भक्तों के लिए अत्यंत करुणामयी और रक्षक हैं।

मां भद्रकाली (Bhadrakali)

भद्रकाली को महाकाली का 'भद्र' यानी कल्याणकारी रूप माना जाता है, जो भक्तों की रक्षा करती हैं। माता भद्रकाली, माता मातंगी की बहन हैं, जो श्रीकुल परंपरा से संबंधित हैं। शिव पुराण, वायु पुराण और महाभारत जैसे ग्रंथों में मां भद्रकाली की उत्पत्ति की कथा मिलती है। कथा के अनुसार, जब राजा दक्ष के यज्ञ में माता सती का अपमान हुआ, तब भगवान शिव के क्रोध से भद्रकाली प्रकट हुईं और उन्होंने दक्ष के यज्ञ का विध्वंस किया।

Kali mata I (1)

(Picture Credit: Freepik) (AI Image)

भद्रकाली का स्वरूप

देवी भद्रकाली के स्वरूप की बात की जाए, तो वह त्रिनेत्रधारी हैं। वह बाघ या शेर की सवारी करती हैं। देवी भद्रकाली ने अपने एक सिर में कटा हुआ सिर पकड़ा हुआ है। उनके अनेक हाथ हैं, जिनमें वह हंसिया, गदा, त्रिशूल धारण किए हुए हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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