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    Mahabharat: बचपन की इस घटना के कारण भीम को मिला था 10 हजार हाथियों का बल

    Updated: Tue, 14 May 2024 01:02 PM (IST)

    महाभारत हिंदू धर्म के मुख्य ग्रंथों में से एक है। महाभारत में ऐसे कई योद्धाओं का वर्णन मिलता है जो बेहद शक्तिशाली थे इन्हीं योद्धाओं में भीम का नाम भी शामिल है। कहते हैं कि भी में 10 हजार हाथियों के समान बाल था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भीम को यह बल कैसे प्राप्त हुआ। अगर नहीं तो जानते हैं इससे जुड़ी कथा।

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    Mahabharat Bheem भीम को ऐसे मिला 10 हजार हाथियों का बल।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Mahabharat Bheem: भीम भी महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक हैं, जो पांच पांडवों में से एक थे। उनकी गिनती भी महाभारत के महान योद्धाओं में की जाती है। महाभारत में ऐसी कई कथाएं शामिल है, जिसमें भीम के बलशाली होने का वर्णन मिलता है। उन्हें हरा पाना किसी के भी बस की बात नहीं थी।  

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    दुर्योधन ने दिया विष

    कथा के अनुसार, दुर्योधन बचपन से ही पांडवों विशेषकर भीम के प्रति हीन भावना रखता था। एक बार बचपन में जब सभी पांडव गंगा तट पर खेल रहे थे, तब दुर्योधन ने भीम के भोजन में विष मिला दिया, जिसे खाने के बाद भीम बेहोश होकर धरती पर गिर गए। इसके बाद दुर्योधन ने मौका पाकर भीम को गंगा जी में डूब दिया।

    आर्यक नाग का भीम से संबंध

    गंगा जी में डूबने के बाद भीम नागलोक जा पहुंचे, जहां उन्हें सांपों ने डसना शुरू कर दिया। जिसके प्रभाव से उनके शरीर से विष का असर कम हो गया। लेकिन भीम के होश में आने के बाद उन्होंने सांपों को मारना शुरू कर दिया। जिससे डरकर सभी सांप नागों के राजा वासुकी के पास पहुंचे और उन्हें सारी व्यथा सुनाई। इस दौरान वहां आर्यक नाग भी मौजूद थे, जो भी के नाना जी के नाना जी थे।

    इस तरह मिला 10 हजार हाथियों का बल

    सारी बातें जान लेने के बाद नागराज वासुकि आर्यक नाग के साथ खुद भीम के पास गए। वहां उन्होंने भीम को पहचान लिया। उन्होंने ही भीम को एक ऐसा विशेष रस प्रदान किया, जिसमें 10 हजार हाथियों का बल था। इस रस को पीने के बाद भीम सो गए। इसके कुछ दिनों बाद उनमें भी 10,000 हाथियों की ताकत आ गई। तब नागों ने उन्हें पुनः गंगा के तट पर छोड़ दिया। हस्तिनापुर पहुंचने के बाद भीम ने माता कुंती और अपने भाइयों को सारी बात बताई।

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।