महाअष्टमी पर सुबह, शाम या रात कब करें हवन? जानें शुभ मुहूर्त और सरल विधि
महाअष्टमी पर हवन कब करें? जानें हवन करने का सही समय सुबह, शाम या रात में से कौन सा है। ...और पढ़ें

महाअष्टमी पर सुबह या दोपहर में हवन करना उत्तम है । (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र में महाअष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। भक्त माता रानी को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं, कन्या पूजन करते हैं और हवन के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना करते हैं। लेकिन कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि महाअष्टमी पर हवन सुबह करना चाहिए, शाम को या रात में? आइए जानते हैं हवन का सही समय, शुभ मुहूर्त और सरल विधि। इस विषय में हमारी बातचीत उज्जैन के पंडित एंव ज्योतिषाचार्य मनीष शर्मा से हुई है। चलिए जानते हैं कि वो क्या कहते हैं।
महाअष्टमी पर हवन सुबह, शाम या रात कब करें?
पंडित मनीष जी के अनुसार, " महाअष्टमी पर हवन सुबह या दोपहर के समय करना अच्छा माना जाता है। इस दौरान मां दुर्गा की पूजा करने के बाद हवन किया जा सकता है। कई घरों में हवन के बाद कन्या पूजन करने और फिर व्रत खोलने की की भी रीत है, तो ऐसा करना भी गलत नहीं है।
महाअष्टमी हवन का शुभ मुहूर्त 2026
शारदीय नवरात्र 2026 में महाअष्टमी की पूजा 19 अक्टूबर को पड़ने की जानकारी दी गई है। इस दिन हवन करने के लिए कुछ विशेष मुहूर्त इस प्रकार हैं-
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:41 बजे से 5:30 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:20 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक।
- सर्वार्थ सिद्धि योग: दोपहर 3:38 बजे से रात तक।
पंडित मनीष जी के अनुसार, "19 अक्टूबर को पूरे दिन में इन तीन में से किसी भी मुहूर्त में व्रत किया जा सकता है।"
महाअष्टमी पर हवन करने की सरल विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल और हवन कुंड को साफ करें। मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं और फूल, अक्षत, फल तथा मिठाई अर्पित करें।
- हवन शुरू करने से पहले हाथ में थोड़ा जल, फूल और अक्षत लेकर मां दुर्गा का ध्यान करें। अपने परिवार की सुख-समृद्धि और शांति के लिए हवन करने का संकल्प लें। इसके बाद जल को किसी स्वच्छ पात्र में छोड़ दें।
- हवन कुंड में सूखी लकड़ियां या हवन सामग्री व्यवस्थित करें। सुरक्षित तरीके से अग्नि प्रज्वलित करें। हवन के दौरान बच्चों और ज्वलनशील वस्तुओं को अग्नि से दूर रखें।
- सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें। इसके बाद मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करते हुए हवन सामग्री और घी की आहुति दें।आप इस मंत्र का जाप कर सकते हैं:
- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। अपनी श्रद्धा के अनुसार आहुतियां दें। यदि विधि की जानकारी नहीं है, तो किसी जानकार पंडित की सहायता लें।
- हवन के अंत में परंपरा के अनुसार पूर्णाहुति दें। इसके बाद मां दुर्गा की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें। फिर अपनी परंपरा के अनुसार कन्या पूजन करें और प्रसाद बांटें।
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