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    Gupt Navratri पर इन कार्यों से बनाएं दूरी, वरना बढ़ सकती हैं जीवन की मुश्किलें

    इस साल माघ मास की गुप्त नवरात्र की शुरुआत 30 जनवरी यानी आज से हो रही है। वहीं इस दौरान भक्त मां दुर्गा की 10 महाविद्याओं की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान मां की विशेष आराधना करने से सभी संकटों का नाश होता है। वहीं इस पावन समय को लेकर कुछ नियम (Magh Gupt Navratri 2025) बनाए गए हैं जिनका पालन करना बहुत जरूरी होता है।

    By Vaishnavi Dwivedi Edited By: Vaishnavi Dwivedi Updated: Thu, 30 Jan 2025 09:59 AM (IST)
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    Magh Gupt Navratri 2025: गुप्त नवरात्र पर क्या करें और क्या नहीं?

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। माघ गुप्त नवरात्र का पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व दुर्गा माता की पूजा के लिए बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में देवी के साथ उनकी 10 महाविद्याओं की पूजा होती है। यह अवधि तंत्र विद्या के लिए बहुत महत्व रखती हैं। इसलिए इस दौरान मां की विधिवत पूजा करें और हो सके तो कठिन व्रत का पालन करें। वहीं, इस पावन समय को लेकर कुछ नियम बनाए हैं, जिसका पालन हर किसी को करना चाहिए, तो आइए उन नियमों (Magh Gupt Navratri 2025) के बारे में जानते हैं, जो इस प्रकार हैं।

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    गुप्त नवरात्र पर इन विशेष बातों का रखें ध्यान (Magh Gupt Navratri Rules)

    • माघ गुप्त नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के रौद्र रूपों यानी 10 महाविद्याओं की पूजा जरूर करें।
    • इस दौरान पवित्रता का खास ध्यान रखना चाहिए।
    • इस दौरान तामसिक चीजों से दूरी बनाए रखें।
    • माना जाता है इस दौरान घर में देवी के रौद्र स्वरूपों की स्थापना नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह तंत्र विद्या के लिए महत्वपूर्ण है।
    • माना जाता है कि इस दौरान तंत्र-मंत्र का अधिकार सिर्फ तांत्रिकों को होता है।
    • माघ गुप्त नवरात्र के दौरान गृहस्थियों को सिर्फ हवन और सात्विक पूजा का पालन करना चाहिए।
    • इस दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना कल्याणकारी माना जाता है।
    • इस मौके पर जवार नहीं बोए जाते हैं।
    • माघ गुप्त नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के वैदिक मंत्रों का जाप बेहद शुभ माना जाता है।

    घटस्थापना मुहूर्त - सुबह 09 बजकर 25 मिनट से सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक

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    शुभ योग

    हिंदू पंचांग के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। फिर गोधूलि मुहूर्त शाम 05 बजकर 56 मिनट से शाम 06 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इसके बाद अमृत काल रात 08 बजकर 03 मिनट से रात 09 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।

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    अस्वीकरण: ''इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है''।