Maa Mahagauri Puja: महाअष्टमी पर कैसे करें मां महागौरी की पूजा? जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र, भोग और पौराणिक कथा
महाअष्टमी पर मां महागौरी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और भोग की विस्तृत जानकारी दी गई है। यह लेख ...और पढ़ें
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महाअष्टमी पर ऐसे करें मां महागौरी की पूजा ? (Picture Credit- AI Generated)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र की महाअष्टमी पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना करने से जीवन में सुख-शांति आती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन भक्त माता रानी को फूल, फल, मिठाई और नारियल अर्पित करते हैं। कई घरों में महाअष्टमी पर कन्या पूजन भी किया जाता है। आइए जानते हैं मां महागौरी का स्वरूप, पूजा विधि, प्रिय भोग, मंत्र और उनकी पौराणिक कथा।
पूजा शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में महाअष्टमी और मां महागौरी की पूजा 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार) को मनाई जाएगी।
• ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 52 मिनट से 5 बजकर 40 मिनट तक
• अमृत काल: सुबह 7 बजकर 28 मिनट से 9 बजकर 16 मिनट तक
• अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक
• संधि पूजा का समय: सुबह 10बजकर 27 मिनट से 11 बजकर 15 मिनट तक
• अष्टमी तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर 2026, सुबह 10 बजकर मिनट तक
मां महागौरी का स्वरूप कैसा है?
मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत शांत, सुंदर और तेजस्वी माना जाता है। इनके नाम में ‘महा’ का अर्थ महान और ‘गौरी’ का अर्थ उज्ज्वल या गौर वर्ण से जुड़ा है।
मां महागौरी का वर्ण सफेद है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं और वृषभ यानी बैल पर सवार रहती हैं। उनकी चार भुजाएं हैं। एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में डमरू होता है, जबकि अन्य दो हाथ आशीर्वाद और अभय मुद्रा में माने जाते हैं। उनका यह स्वरूप शांति, पवित्रता और करुणा का प्रतीक है।
मां महागौरी की पूजा विधि
- महाअष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल की सफाई करें और चाहें तो गंगाजल छिड़कें। इसके बाद मां महागौरी की प्रतिमा या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें।
- मां महागौरी को सफेद फूल विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं। उन्हें फूल, रोली, चंदन, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें। इसके बाद फल और मिठाई चढ़ाकर माता रानी का ध्यान करें।
- पूजा के दौरान मां महागौरी के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें। इसके बाद दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करें।
- पूजा के अंत में मां महागौरी की आरती करें। कई परिवारों में महाअष्टमी पर कन्या पूजन की परंपरा है। इस दौरान कन्याओं को भोजन कराया जाता है और श्रद्धापूर्वक दक्षिणा या उपहार दिए जाते हैं।
- मां महागौरी को नारियल और नारियल से बनी मिठाइयों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा हलवा, पूरी, काले चने और अन्य सात्विक पकवान भी अर्पित किए जाते हैं।
- भोग लगाते समय स्वच्छता का ध्यान रखें और माता रानी से परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। बाद में प्रसाद परिवार और अन्य भक्तों में बांटें।
मां महागौरी के प्रमुख मंत्र
मूल मंत्र:
ॐ देवी महागौर्यै नमः।
ध्यान मंत्र:
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
इन मंत्रों का जाप करते समय मन को शांत रखें और मां दुर्गा का ध्यान करें।
मां महागौरी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। लंबे समय तक तपस्या करने के कारण उनके शरीर पर धूल-मिट्टी जम गई और उनका वर्ण सांवला पड़ गया।
माता पार्वती की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए। मान्यता है कि भगवान शिव ने गंगा के पवित्र जल से उनके शरीर को स्वच्छ किया। इसके बाद माता का स्वरूप अत्यंत उज्ज्वल और गौर हो गया। इसी कारण वे मां महागौरी के नाम से प्रसिद्ध हुईं।
मां महागौरी का भोग
मां महागौरी को सफेद और सात्विक भोग अतिप्रिय है। इस दिन दूध, चावल और चीनी से बनी सफेद खीर का भोग लगाने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं। अष्टमी और कन्या पूजन पर हलवा, पूरी और काले चने का विशेष भोग लगाया जाता है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा बताशे और दूध से बनी सफेद मिठाइयां भी माता को अर्पित की जा सकती हैं। मान्यता है कि ऐसे पवित्र भोग से माता महागौरी भक्तों के सभी कष्ट दूर कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
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